अयोध्या राम मंदिर में स्थापित हुआ ‘राम यंत्र’, जानें क्या है इसका आध्यात्मिक महत्व, क्यों खास है यह दिव्य यंत्र

Ram Yantra: नवरात्रि के शुभ अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अयोध्या राम मंदिर में राम यंत्र की स्थापना की। सोने की परत चढ़ा यह दिव्य यंत्र क्या है, इसका आध्यात्मिक महत्व क्या माना जाता है और क्यों इसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक कहा जा रहा है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं..

Ram Yantra: नवरात्रि का पहला दिन हमेशा से नई शुरुआत, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस बार यह दिन और भी खास बन गया, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या पहुंचीं और रामलला के दर्शन किए। वैदिक मंत्रों के बीच उन्होंने राम मंदिर में राम यंत्र की स्थापना की। बताया जा रहा है कि यह विशेष यंत्र तमिलनाडु में तैयार किया गया था और विधि-विधान के साथ यात्रा करते हुए अयोध्या लाया गया। सोने की परत चढ़ा यह पवित्र यंत्र मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित किया गया है, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है।

अयोध्या राम मंदिर में स्थापित हुआ ‘राम यंत्र’

अयोध्या राम मंदिर में स्थापित हुआ ‘राम यंत्र’ (PC- Pinterest)

क्या होता है राम यंत्र?

आसान भाषा में समझें तो यंत्र एक खास तरह की ज्यामितीय आकृति होती है, जिसे वैदिक परंपरा में ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। जैसे मंत्रों की शक्ति शब्दों में मानी जाती है, वैसे ही यंत्र की शक्ति उसकी आकृति और संरचना में मानी जाती है। राम यंत्र भगवान श्रीराम के आदर्शों – मर्यादा, सत्य और धर्म – को दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यंत्र का निर्माण विशेष गणितीय और ज्यामितीय सिद्धांतों के आधार पर किया जाता है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी आकृतियां ध्यान के दौरान मन को स्थिर करने में मदद कर सकती हैं, जिससे मानसिक शांति और सकारात्मक सोच बढ़ती है।

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