What is Hatha Yoga in Hindi (हठ योग क्या होता है): महाकुंभ का आगमन हो चुका है और पूरे देश में आध्यात्मिक उमंग और जोश की एक अलग ही लहर छाई हुई है। कुंभ में आए नागा साधु अपने अनोखे रंग-रूप के लिए विश्व भर में जाने जाते हैं। लेकिन इन्हीं साधु-संतों में से कुछ ऐसे साधक हैं जो सालों से हठ योग कर रहे हैं। किसी ने अपने हाथ उठाए हैं तो कोई एक पैर पर वर्षों से अटल खड़ा है। लेकिन हठ योग क्या है? हठ योग प्राचीन योग क्रिया का एक भाग है जिसमें शारीरिक आसनों के द्वारा शरीर को खास ढंग से संचालित किया जाता है। इस योग में ऊर्जा को एक दिशा में केंद्रित किया जाता है।
Naga Sadhuo ke Hath Yog ki Manyata
हठ योग की परिभाषा क्या है
हठ योग में संसार की माया से परे, आंतरिक और ईश्वरी शक्ति पर ध्यान दिया जाता है। हठयोग में हठ शब्द दो शब्दों के संयोग से बना है। ‘ह’ सूर्य से जुड़ा है जबकि ‘ठ’ चंद्रमा से जुड़ा है। सूर्य मानव शरीर में ऊर्जा भरता है और चंद्रमा मानव शरीर को शीतलता प्रदान करता है। इन दोनों प्राकृतिक ऊर्जाओं का संतुलन बनाए रखने के लिए ही हठयोग का अभ्यास किया जाता है।
Elements of Hath Yog (हठ योग के अंग)
हठ प्रदीपिका और अन्य प्राचीन योग सूत्रों में हठ योग के चार विभिन्न अंगों का वर्णन किया गया है जिसमें आसन, प्राणायाम, मुद्रा और नादानुसंधान आते हैं। घेरण्ड संहिता में हठ योग के सात अंगों का वर्णन मिलता है जिसमें षटकर्म, आसन, मुद्राबन्ध, प्राणायाम, ध्यान, समाधि आते हैं और वहीँ योगतत्वोपनिषद में इसके आठ अंगों का वर्णन है जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि है, जिसकी आज के परिवेश में अधिक मान्यता है।
Hatha Yoga Significance (हठ योग का महत्व)
वैसे तो हठ योग पर कई ग्रंथ लिखे गए हैं जिसमें हठ प्रदीपिका प्रसिद्ध है। हठ योग में कई प्रकार के आसन किए जाते हैं, जैसे कि भुजंगासन, धनुरासन, गरुड़ासन, मयूरासन, गुप्तासन, वज्रासन, वृक्षासन, ताड़ासन और पद्मासन। सरल भाषा में समझने की कोशिश करे तो हठ योग प्राचीन योग शैली का सबसे प्रचंड रूप है क्योंकि इसे बल और संयम के साथ किया जाता है। कुंभ में आए अधिकतर नागा साधु और संत-महात्मा हठ योग करते हैं ताकि उन्हें दैवी शक्तियां आशीर्वाद के रूप में प्राप्त हो सके। हठ योग करने से मनुष्य के ध्यान, बल और ज्ञान में वृद्धि होती है।
