Shri Mahakal Lok: मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग को लेकर सालों से एक भ्रम बना हुआ है। अक्सर हम बचपन से सुनते आए हैं कि यहां भगवान शिव को चिते की राख से भस्म आरती की जाती है। महाकाल मंदिर के पुजारियों को मानें तो यह सरासर गलत है। ऐसा कभी नहीं हुआ है, यहां कंडे से बने राख से महाकाल की भस्म आरती की जाती है।
महाकाल की भस्म आरती (Photo- Shree Mahakaleshwar Ujjain)
टाइम्स नाउ नवभारत के शो में सुशांत सिन्हा से बात करते हुए महाकाल मंदिर के एक पुजारी ने कहा कि यह भ्रम है कि चिता की राख से भगवान भोले की भस्म आरती की जाती है। उन्होंने कहा- "भस्म कभी भी भगवान भोले नाथ के ऊपर...मुर्दे की नहीं चढ़ाई जाती है। ये कभी नहीं हुई है...ये भ्रम है। मैं आपके चैनल के माध्यम से ये मैं कहना चाहूंगा भक्तों से कि यहां भगवान महाकाल को किसी प्रकार के मुर्दे की भस्म नहीं चढ़ाई जाती है। केवल यहां शुद्ध कंडे होते हैं, उसके पांच कंडों की भस्म बनाई जाती है और वहीं मंत्रों से चढ़ाई जाती है।"
मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि 99% हिंदुओं को पता नहीं होगा कि बाबा महाकाल को लेकर इतना बड़ा झूठ/भ्रम फैलाया गया है… t.co/XW3oUNyVwO
— ANI (@ANI) Oct 8, 2022
पुजारी जी ने आगे कहा कि भस्म चढ़ाने का जो विधान चला, ये चला है सती प्रथा से। उन्होंने कहा- "जो सती थीं इनकी पत्नी, जिन्होंने अपने शरीर को हवन कुंड के अंदर समाप्त कर लिया था, वो जब भस्म हो गईं थीं और भगवान जब उसके विरह में क्रोधित हो गए थे....तब उन्होंने सती के भस्म को अपने शरीर पर लगाया था। तो वो जो भस्म है, वो भगवान शिव के शरीर पर लगी है। इसलिए भस्म प्रतीकात्मक भगवान पर चढ़ाई जाती है।
