हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन वास्तुशास्त्र के जनक भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। कहते हैं उन्होंने ही सभी देवताओं के भवनों का निर्माण भी किया था। साथ ही रावण की लंका, भगवान श्री कृष्ण की द्वारिका और इंद्रप्रस्थ का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। इस वजह से ही विश्वकर्मा जी को संसार का सबसे बड़ा इंजीनियर कहा जाता है। यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर सभी संस्थानों को बंद रखा जाता है और कार्यस्थल पर प्रयोग किए जाने वाली चीजों की पूजा की जाती है। जैसे की हथियार, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक समान आदि। यहां देखिए विश्वकर्मा पूजा की सामग्री लिस्ट।
Vishwakarma Puja Samagri List In Hindi: विश्वकर्मा पूजा सामग्री लिस्ट इन हिंदी
- विश्वकर्मा भगवान की प्रतिमा
- रोली
- लौंग
- इलायची
- सर्वौषधि
- सप्तमृत्तिका
- पीली सरसों
- जनेऊ 5 पीस
- इत्र
- पीला सिंदूर
- पीला अष्टगंध चंदन
- लाल सिंदूर
- हल्दी (पिसी)
- जटादार सूखा नारियल 1 पीस
- अक्षत (चावल) 1 किलो
- धूपबत्ती
- रुई की बत्ती (गोल / लंबी)
- देशी घी
- हल्दी (समूची)
- सुपाड़ी (समूची बड़ी)
- गरी का गोला (सूखा) 2 पीस
- पानी वाला नारियल 1 पीस
- कपूर
- कलावा
- लाल वस्त्र 1 मीटर
- पीला वस्त्र 1 मीटर
- कुश (पवित्री)
- लकड़ी की चौकी
- चुनरी (लाल या पीली)
- बताशा 500 ग्राम
- गंगाजल
- नवग्रह चावल
- दोना (छोटा-बड़ा)
- मिट्टी का कलश (बड़ा)
- मिट्टी का प्याला 8 पीस
- नवग्रह समिधा 1 पैकेट
- हवन सामग्री 500 ग्राम
- तिल 100 ग्राम
- जौ 100 ग्राम
- मिट्टी की दियाली 8 पीस
- हवन कुण्ड
- माचिस
- आम की लकड़ी 2 किलो
- पंचरत्न व पंचधातु
- धोती पीली या लाल 1 पीस
- अगोंछा पीला या लाल 1 पीस
- गुड़ 100 ग्राम
- कमलगट्टा 100 ग्राम
- शहद
- पंचमेवा
- मिष्ठान 500 ग्राम
- पान के पत्ते (समूचे) 21 पीस
- ऋतु फल 5 प्रकार के
- दूब घास 50 ग्राम
- केले के पत्ते 5 पीस
- आम के पत्ते 2 डंठल
- फूल माला
- गुलाब/गेंदा का खुला हुआ फूल 500 ग्राम
- धोती
- कुर्ता
- अंगोछा
- पंच पात्र
- माला इत्यादि
- तुलसी की पत्ती
- दूध 1 लीटर
- दही 1 किलो
- जल (पूजन हेतु)
- गाय का गोबर
- मिट्टी
- बिछाने का आसन
- आटा 100 ग्राम
- चीनी 500 ग्राम
- अखंड दीपक
- तांबे/पीतल का कलश
- थाली
- कटोरी
- चम्मच
- परात
- पंचामृत
विश्वकर्मा पूजा विधि
विश्वकर्मा पूजा वाले दिन सुबह जल्दी उठकर पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाली सभी आवश्यक सामग्रियों को जुटा लें। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की विधि विधान पूजा करें। उन्हें चावल और सफेद फूल अर्पित करें। इसके बाद हवन करें। कार्यस्थल में प्रयोग किए जाने वाली मशीनों की पूजा करें। फिर भगवान विश्वकर्मा को प्रसाद चढ़ाएं और अंत में सभी लोगों में प्रसाद वितरित कर दें।
