Vishwakarma Puja Vidhi, Aarti, Mantra (विश्वकर्मा पूजा विधि, मंत्र और आरती): धार्मिक मान्यता है कि कन्या संक्रांति के दिन भगवान विश्वकर्मा का अवतरण हुआ था। इसी वजह से इस दिन को विश्वकर्मा जयंती के रूप में मनाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा को स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान, कुबेरपुरी जैसे सभी देवनगरी का रचनाकार कहा जाता है। इसके अलावा भगवान विश्वकर्मा ने सोने की लंका और भगवान श्रीकृष्ण के लिए द्वारका नगरी का निर्माण किया था। धार्मिक मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से जातक को कार्यक्षेत्र में आ रही बाधा से मुक्ति मिलती है और बिजनेस में अपार सफलता प्राप्त होती है। यहां से आप विश्वकर्मा भगवान की पूजा करने की विधि जान सकते हैं। साथ ही यहां विश्वकर्मा भगवान के मंत्र और आरती भी मौजूद है।
विश्वकर्मा पूजा मंत्र (Vishwakarma Puja Mantra)-
नमस्ते विश्वकर्माय, त्वमेव कर्तृता सदा।
शिल्पं विधाय सर्वत्र, त्वं विश्वेशो नमो नमः।।
विश्वकर्मा पूजा पूजा विधि (Vishwakarma Puja Vidhi)-
- सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले अपनी गाड़ी, मोटर या दुकान की मशीनों को साफ करें।
- इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर अपनी पत्नी के साथ पूजा के स्थान पर बैठ जाए।
- सबसे पहले हाथ में फूल लेकर श्री हरि विष्णु भगवान का ध्यान करें और फिर उन्हें पुष्प चढ़ाएं।
- इसके बाद विश्वकर्मा भगवान की पूजा करें।
- पूजा के स्थान पर जल से भरा कलश, अक्षत, माला, धूप, सुपारी, फूल, चंदन, पीली सरसों आदि चीजें जरूर रखें।
- हाथ में फूल और अक्षत लेकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए इस मन्त्र का उच्चारण करें, “ऊं आधार शक्तपे नमः ऊं कूमयि नमः ऊं अनंतम नमः ऊं पृथिव्यै नमः ऊं श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः।”
- इसके बाद हाथ में लिए अक्षत और फूल भगवान को समर्पित करें।
- फिर पीली सरसों की चार पोटलियां बनाएं और उन्हें चारों दिशाओं में द्वार बांध दें।
- इसके बाद अपने हाथ में और पूजा में उपस्थित अन्य लोगों के हाथ में कलावा बांधें।
- अब जमीन पर आठ पंखुड़ियों वाला कमल बनाकर उसे पुष्प अर्पित करें।
- इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की आरती उतारे और सभी में प्रसाद बांटे।
- पूजन से अगले दिन विश्वकर्मा भगवान की प्रतिमा का विसर्जन करने का विधान है।
विश्वकर्मा पूजा आरती (Vishwakarma Ji Ki Aarti)-
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा॥ ॐ जय…
आदि सृष्टि में विधि को श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्रा का जग में, ज्ञान विकास किया॥ ॐ जय…
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥ ॐ जय…
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुःख कीना॥ ॐ जय…
जब रथकार दंपति, तुम्हरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी॥ ॐ जय…
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप सजे॥ ॐ जय…
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे॥ ॐ जय…
“श्री विश्वकर्मा जी” की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानंद स्वामी, सुख संपति पावे॥ ॐ जय…
विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त 2025 (Vishwakarma Puja 2025 Shubh Muhurat)
- विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2025, बुधवार
- विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रान्ति का क्षण 01:55 AM
- ब्रह्म मुहूर्त 04:33 ए एम से 05:20 ए एम
- प्रातः सन्ध्या 04:57 ए एम से 06:07 ए एम
- अभिजित मुहूर्त कोई नहीं
- विजय मुहूर्त 02:18 PM से 03:07 PM
- गोधूलि मुहूर्त 06:24 PM से 06:47 PM
- सायाह्न सन्ध्या 06:24 PM से 07:34 PM
- अमृत काल 12:06 AM, सितम्बर 18 से 01:43 ए एम, सितम्बर 18
- निशिता मुहूर्त 11:52 PM से 12:39 AM, सितम्बर 18
