Vighneshwar Chaturthi Vrat Katha: विघ्नेश्वर चतुर्थी व्रत कथा, यहां सुनें सुंदर ब्राह्मण और वामदेव जी की कहानी

Vighneshwar Chaturthi Vrat Katha (विघ्नेश्वर चतुर्थी व्रत कथा): आज विघ्नेश्वर चतुर्थी है और आज का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन पूजा करने से कार्यों में सफलता, बुद्धि-विवेक और सौभाग्य की प्राप्ति मानी जाती है। आज के दिन विघ्नेश्वर चतुर्थी की कथा भी जरूर पढ़नी चाहिए। यहां से आप विघ्नेश्वर चतुर्थी व्रत कथा देख सकते हैं।

Vighneshwar Chaturthi Vrat Katha (विघ्नेश्वर चतुर्थी व्रत कथा): विघ्नेश्वर चतुर्थी की पौराणिक कहानी के अनुसार, अवन्ती नगरी में सुदंत नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह सभी शास्त्रों में पारंगत था। उसकी पत्नी का नाम विलासिनी था, वह भी अत्यन्त पतिव्रता। सुदंत अवंती के राजा बृहद्रथ का पुरोहित था। राजा को धर्म के अनुसार राज्य चलाने का शिक्षा सुदंत ही देता था। वैसे तो सुदंत के जीवन में कोई परेशानी नहीं थी लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी।

विघ्नेश्वर चतुर्थी व्रत कथा (pic credit: canva)

अनेक उपचार आदि करने के बाद भी जब सुदंत को संतान की प्राप्ति नहीं हुई तो वह अपनी पत्नी के साथ वन में जाकर तपस्या करने लगा। बहुत समय बाद जंगल में महामुनि वामदेव जी आए और उन्होंने सुदन्त से इस तपस्या का कारण पूछा। सुदंत ने उन्हें पूरी बात सच-सच बता दी। वामदेवजी ने सुदंत से कहा ‘संतानहीन व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष नहीं मिलता।’

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