Vat Savitri Vrat kis Tarikh ko hai 2026 LIVE: कल या परसों - वट सावित्री व्रत कब है 2026 का, किस तारीख को होगी पूजा, जानें सामग्री, मुहूर्त आदि की पूरी जानकारी
वट सावित्री व्रत कब रखा जाएगा 2026 में
वट सावित्री व्रत 2026 में 16 मई को रखा जाएगा। इस दिन बड़ अमावस, शनि जयंती भी है।
वट सावित्री व्रत पूजा में क्या क्या सामान लगता है
- वट (बरगद) वृक्ष की पूजा के लिए जल
- कच्चा सूत / मौली धागा
- रोली, हल्दी और कुमकुम
- अक्षत (चावल)
- सिंदूर
- फूल और फूलों की माला
- धूप, दीप और अगरबत्ती
- घी और रुई की बाती
- नारियल
- पान, सुपारी और लौंग
- भीगे हुए चने
- फल और मिठाई
- पूड़ी-पकवान या घर का प्रसाद
- लाल या पीला कपड़ा
- मिट्टी या पीतल का कलश
- सावित्री-सत्यवान की तस्वीर या मूर्ति
- वट सावित्री व्रत कथा पुस्तक
- सोलह श्रृंगार का सामान (चूड़ी, बिंदी, महावर आदि)
- दक्षिणा और दान की सामग्री
- कपूर और बताशे
वट सावित्री व्रत की कहानी क्या है
वट सावित्री व्रत की कथा सावित्री और सत्यवान की अटूट प्रेम और समर्पण की कहानी है। राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने सत्यवान को अपना पति चुना, जबकि उसे पता था कि उसकी आयु बहुत कम है। विवाह के बाद एक दिन जंगल में सत्यवान की मृत्यु हो गई। तब यमराज उसके प्राण लेने आए, लेकिन सावित्री अपने पति के पीछे-पीछे चलती रही और अपनी बुद्धिमानी व पतिव्रता धर्म से यमराज को प्रसन्न कर लिया। यमराज ने सावित्री को वरदान दिया और अंत में सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं।
वट सावित्री व्रत पूजन समय
वट सावित्री व्रत की पूजा के लिए पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक रहेगा।वट वृक्ष की करें इतनी परिक्रमा
वट वृक्ष की करीब 7 परिक्रमा अवश्य करें।वट सावित्री व्रत में क्या खाना चाहिए
वट सावित्री व्रत में सात्विक और फलाहारी भोजन करना चाहिए। इसमें आपको अन्न नहीं खाना चाहिए।वट सावित्री पर जरूर करें ये काम
वट सावित्री व्रत पर कथा पढ़ना या सुनना काफी आवश्यक माना गया है।बरगद पर लपेटे हुए धागे का क्या करें
बरगद पर जो धागा लपटे उसको पूरा अंत तक न ले जाएं। जब कुछ धागा बचा हो तो उसको उसी पेड़ में लगा दें।वट सावित्री व्रत में धागा कितनी बार लपेटें
पूजा के दौरान महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर सूत का धागा लपेटती हैं। अधिकतर जगहों पर 7 या 11 बार परिक्रमा करने की परंपरा है। यह पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है।वट सावित्री व्रत की पूजा कितने बजे करें
वट सावित्री की पूजा सुबह स्नान के बाद शुरू की जाती है। दोपहर के समय वट वृक्ष की पूजा करना शुभ माना जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर पूजा करना बेहतर होता है।वट सावित्री व्रत में कितनी बार धागा बांधा जाता है
अलग-अलग परंपराओं में संख्या अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर 7 या 11 बार धागा लपेटा जाता है।वट सावित्री व्रत पर क्या दान करें
वट सावित्री व्रत पर फल, अन्न, वस्त्र और ठंडे जल का दान करना शुभ माना गया है।वट सावित्री व्रत पर क्यों होती है बरगद की पूजा
माना जाता है कि बरगद के पेड़ पर त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। इसकी जड़ में ब्रह्मा और तने में विष्णु व शाखाओं पर शंकर वास करते हैं। इसके साथ ही इसको अक्षय वट कहा जाता है, क्योंकि यह कभी भी पूरी तरह से नष्ट नहीं होता है। सावित्री ने अपने पति सत्यवान को बरगद के पेड़ के नीचे ही यमराज से जीवनदान दिलाया था।क्या पति के बिना भी पूजा की जा सकती है
हां, महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से अकेले भी यह पूजा कर सकती हैं।वट सावित्री व्रत में कौन से फल चढ़ाना शुभ माना जाता है
आम, केला, नारियल, खरबूजा और मौसमी फल चढ़ाना शुभ माना जाता है।अगर पीरियड्स हों तो क्या वट सावित्री व्रत कर सकते हैं
यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था और परिवार की परंपराओं पर निर्भर करता है। कई महिलाएं इस दौरान मन से पूजा और व्रत करती हैं।वट सावित्री व्रत में काला कपड़ा पहनना चाहिए या नहीं
इस दिन आमतौर पर लाल, पीला, हरा या सुहाग के रंग पहनना शुभ माना जाता है। काले रंग से परहेज किया जाता है।वट सावित्री व्रत की कथा सुनाओ
वट सावित्री व्रत की कथा सावित्री और सत्यवान की अटूट प्रेम और समर्पण की कहानी है। राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने सत्यवान को अपना पति चुना, जबकि उसे पता था कि उसकी आयु बहुत कम है। विवाह के बाद एक दिन जंगल में सत्यवान की मृत्यु हो गई। तब यमराज उसके प्राण लेने आए, लेकिन सावित्री अपने पति के पीछे-पीछे चलती रही और अपनी बुद्धिमानी व पतिव्रता धर्म से यमराज को प्रसन्न कर लिया। यमराज ने सावित्री को वरदान दिया और अंत में सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए।वट वृक्ष की पूजा का क्या महत्व है
वट यानी बरगद का पेड़ लंबी आयु, स्थिरता और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।क्या इस दिन सिंदूर और श्रृंगार करना जरूरी होता है
वट सावित्री व्रत वैवाहिक जीवन से जुड़ा है। इसलिए व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाएं इस दिन पूरा श्रृंगार करती हैं, जिसे शुभ माना जाता है।वट सावित्री पूजा के बाद धागे का क्या किया जाता है
वट सावित्री पूजा के धागे को शुभ मानकर संभालकर रखा जाता है या पेड़ पर ही छोड़ दिया जाता है।वट सावित्री व्रत में चंद्रमा की पूजा होती है क्या
नहीं, इस व्रत में मुख्य रूप से वट वृक्ष और सावित्री-सत्यवान की पूजा की जाती है। वैसे भी यह व्रत उत्तर भारत में अमावस की तिथि पर रखा जाता है। तो इस दिन चंद्र देव की पूजा का कोई विधान नहीं बनता है।क्या पुरुष भी वट सावित्री व्रत रख सकते हैं
वट सावित्री व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा रखा जाता है, लेकिन श्रद्धा से कोई भी पूजा कर सकता है।वट सावित्री व्रत में क्या दान करना शुभ माना जाता है
वट सावित्री व्रत में फल, वस्त्र, सुहाग सामग्री, जल और भोजन का दान शुभ माना जाता है।क्या वट सावित्री व्रत में लाल कपड़े पहनना शुभ माना जाता है
हां, सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक होने के कारण लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।वट सावित्री व्रत में क्या खाया जाता है
वट सावित्री पूजा में अधिकतर महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।वट सावित्री व्रत में बाल बांधने चाहिए या खुले
पूजा के दौरान साफ-सुथरे और सादगीपूर्ण तरीके से तैयार होना शुभ माना जाता है। ज्यादातर महिलाएं बाल बांधकर पूजा करती हैं।वट सावित्री व्रत में कितने धागे बांधते हैं
महिलाएं बरगद के पेड़ पर कच्चा सूत लपेटती हैं। धागों की संख्या परंपरा और श्रद्धा के अनुसार अलग हो सकती है।वट सावित्री व्रत कितने साल तक करना चाहिए
कई महिलाएं शादी के बाद हर साल यह व्रत करती हैं। इसे आजीवन करने की परंपरा भी मानी जाती है।वट सावित्री व्रत के दिन क्या नहीं खरीदना चाहिए
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नकारात्मक चीजों और विवाद से बचना चाहिए। कई लोग लोहे की वस्तु खरीदने से भी बचते हैं।वट सावित्री व्रत में क्या दान करें
इस दिन सुहाग सामग्री, फल, कपड़े और भोजन का दान शुभ माना जाता है। इससे सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।वट सावित्री व्रत में पानी पी सकते हैं क्या
पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला यह व्रत कई महिलाएं निर्जला रखती हैं। हालांकि कुछ लोग फल और पानी के साथ भी व्रत करते हैं।वट सावित्री व्रत में फलाहार
व्रत में फल, दूध, सूखे मेवे और साबूदाना जैसी चीजें खाई जाती हैं। सात्विक भोजन को शुभ माना जाता है।वट सावित्री में किस पेड़ की पूजा होती है?
वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां बरगद के पेड़ पर सूत लपेटकर परिक्रमा करती हैं।वट सावित्री व्रत कब रखा जाता है
वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है। वहीं, कुछ जगहों पर यह ज्येष्ठ पूर्णिमा पर रखा जाता है।पूजा के दौरान मंत्र
पूजा के दौरान महिलाएं यह मंत्र बोलती हैं। “वट वृक्षाय नमः, सावित्र्यै नमः, सत्यवानाय नमः।”
वट वृक्ष को सूत बांधना
वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष को सूत बांधना पति-पत्नी के अटूट रिश्ते और लंबी उम्र का प्रतीक है।
व्रत में कथा क्यों सुनते?
वट सावित्री व्रत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।
वट सावित्री व्रत की पूजा किस समय करें?
वट सावित्री व्रत में सुबह स्नान के बाद शुभ मुहूर्त में पूजा करना उत्तम माना जाता है।
वट सावित्री व्रत चंद्रमा पूजा का महत्व
कुछ जगहों पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। यह परंपरा क्षेत्र के अनुसार बदलती है।वट सावित्री व्रत कथा का महत्व
सावित्री-सत्यवान की कथा पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। कथा सुनना जरूरी माना जाता है।वट सावित्री व्रत उपवास के नियम
व्रत के दौरान सात्विक भोजन और शांत व्यवहार रखने की सलाह दी जाती है। कई महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती हैं।वट सावित्री व्रत में पूजा घर पर कैसे करें?
अगर आसपास बरगद का पेड़ न हो तो घर में बरगद की तस्वीर या टहनी रखकर पूजा की जा सकती है। श्रद्धा और नियम के साथ की गई पूजा को ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।गणेश विसर्जन 2026 मुहूर्त: आज अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को कब दें विदाई- जानें 25 सितंबर की सुबह, दोपहर और शाम का शुभ समय
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