Vat Savitri Puja Without Bargad Tree: हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री पूजा पड़ती है। इस पूजा में विशेष रूप से बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। कहते हैं इस पेड़ की पूजा के बिना ये व्रत अधूरा माना जाता है। लेकिन अगर आपके घर के पास वट यानि बरगद का पेड़ नहीं है तो ऐसे में वट सावित्री की पूजा कैसे कर सकते हैं। इस बारे में हम आपको बताएंगे जिससे पूजा का संपूर्ण फल आपको प्राप्त हो सके।
Vat Savitri Vrat Kaise Kare Agar Bargad Ka Tree Na Mile
वट सावित्री व्रत में क्यों होती है बरगद के पेड़ की पूजा
पौराणिक मान्यताओं अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सावित्री के पति सत्यवान को वट यानि बरगद के पेड़ के नीचे अपने प्राण प्राप्त हुए थे। यही वजह है कि इस अमावस्या पर बरगद के पेड़ की पूजा करते हुए सुहागिन स्त्रियां वट सावित्री व्रत रखती हैं। कहते हैं वट वृक्ष की पूजा से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
बरगद का पेड़ न मिले तो कैसे करें वट सावित्री पूजा
अगर आपके घर के आस-पास बरगद का पेड़ नहीं है तो आप कहीं से इस पेड़ की टहनी या छोटी डाली मंगवा लीजिए। फिर इसकी विधि विधान पूजा करें। इससे भी आपका व्रत संपूर्ण माना जाएगा। इस दिन कई जगह लोग बरगद की टहनी बेचते भी हैं आप चाहें तो इसे वहां से भी खरीद सकते हैं।लेकिन अगर आपको बरगद की टहनी भी नहीं मिल रही है तब आप तुलसी के पेड़ के पास बैठकर भी वट सावित्री व्रत की पूजा कर सकते हैं। इससे भी आपकी पूजा संपूर्ण मानी जाएगी। इस दौरान वट सावित्री पूजा के सभी नियमों का पालन करें। साथ ही तुलसी माता से अपनी सारी कामना भी बता दें।
वट वृक्ष पूजन मंत्र
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।
