Varalakshmi Vrat 2024: इस साल कब रखा जाएगा वरलक्ष्मी व्रत, जानिए सही तिथि और महत्व

Varalakshmi Vrat 2024: हिंदू धर्म में वरलक्ष्मी व्रत का खास महत्व है। वर लक्ष्मी व्रत के दिन माता लक्ष्मी की पूज- उपासना की जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल वरलक्ष्मी का व्रत कब रखा जाएगा और इसका महत्व।

Varalakshmi Vrat 2024: वरलक्ष्मी व्रत के दिन माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना की जाती है। इस दिन का व्रत रखने से और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने से साधक को सुख, समृ्द्धि और धन संपत्ति प्राप्ति होती है। सावन मास की अंतिम शुक्रवार के दिन माता वरलक्ष्मी का व्रत रखा जाता है। इस दिन का व्रत किया जाता है और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। वर लक्ष्मी का व्रत करने से वैवाहिक जीवन में भी खुशियां आती हैं। आइए जानते हैं वर लक्ष्मी का व्रत कब रखा जाएगा और इसके महत्व के बारे में।

Varalakshmi Vrat 2024 (वर लक्ष्मी व्रत 2024)

हिंदू पंचांग के अनुसार वर लक्ष्मी का व्रत हर साल सुहागिन महिलाओं के द्वारा सावन मास के आखिरी शुक्रवार के दिन किया जाता है। इस साल वर लक्ष्मी व्रत 16 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा से कल्याण होगा।

Varalakshmi Vrat 2024 Shubh Muhurat (वर लक्ष्मी व्रत शुभ मुहूर्त 2024)

इस साल वर लक्ष्मी व्रत 16 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। सिंह लग्न पूजा मुहूर्त सुबह 05:57 से 8 बजकर 17 मिनट पर होगा। इस दिन वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त 12:50 से 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त शाम 06:55 से 08:22तक रहेगा। वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त 17 अगस्त रात को 11:22 से 01:08 बजे तक रहने वाला है।

वरलक्ष्मी व्रत की पूजा विधि (Varalakshmi Vrat Puja Vidhi)

  • वर लक्ष्मी व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • उसके बाद मंदिर में साफ चौकी पर माता लक्ष्मी को स्थापित करें।
  • फिर एक लोटे में जल भरकर मूर्ति के सामने कलश स्थापित करें।
  • उसके बाद माता लक्ष्मी को धूप, दीप और सिंगार का सामान अर्पित करें।
  • अंत में कथा का पाठ करें और आरती करके भोग लगाएं।

वरलक्ष्मी व्रत का महत्व (Varalakshmi Vrat Importance)

सनातन धर्म में वरलक्ष्मी व्रत का खास महत्व है। इस दिन का व्रत रखने से अष्टलक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वरलक्ष्मी व्रत करने से और विधिपूर्वक माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन का आगमन होता है और दरिद्रता दूर जाती है। इसके साथ ही इस दिन का व्रत करने से साधक के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।

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