Holika Dahan Timing Today 2026 In Uttar Pradesh: फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। ये खास दिन आज यानी 2 मार्च को ही है। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। आज देशभर में होलिका जलाई जाएगी। तो अगर आप उत्तर प्रदेश यानी यूपी में रहते हैं तो यहां से जान सकते हैं कि आपके शहर में होलिका दहन कितने बजे होने वाला है। यहां यूपी के शहरों की पूरी लिस्ट है, जिसमें यहां से होलिका दहन का मुहूर्त भी देख सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में होलिका दहन कब होगा (pc: canva)
उत्तर प्रदेश के शहरों में होलिका दहन कब होगा (Holika Dahan Time In Uttar Pradesh)-
| शहर का नाम | होलिका दहन का टाइम |
| कानपुर | 6:22 PM से 8:50 PM |
| वाराणसी | 6:22 PM से 8:50 PM |
| लखनऊ | 6:22 PM से 8:50 PM |
| प्रयागराज | 6:22 PM से 8:50 PM |
| आगरा | 6:22 PM से 8:50 PM |
| मेरठ | 6:22 PM से 8:50 PM |
| अयोध्या | 6:22 PM से 8:50 PM |
| गोरखपुर | 6:22 PM से 8:50 PM |
| अलीगढ़ | 6:22 PM से 8:50 PM |
| बरेली | 6:22 PM से 8:50 PM |
| गाजियाबाद | 6:22 PM से 8:50 PM |
| मुरादाबाद | 6:22 PM से 8:50 PM |
| कन्नोज | 6:22 PM से 8:50 PM |
| सहारनपुर | 6:22 PM से 8:50 PM |
होलिका दहन होने के बाद क्या करना चाहिए?
- होलिका दहन के बाद अग्नि की 3 या 7 बार परिक्रमा की जाती है। माना जाता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
- अग्नि में जौ, गेहूं या चने की बालियाँ भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती हैं। इसे नई फसल का प्रतीक और समृद्धि का संकेत माना जाता है।
- अग्नि की ठंडी हुई राख को अगले दिन माथे पर तिलक के रूप में लगाया जाता है। इसे बुरी शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
- कुछ लोग थोड़ी सी राख घर लाकर सुरक्षित स्थान पर रखते हैं, मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
होलिका और भक्त प्रह्लाद की कथा-
पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक हिरण्यकश्यप नामक शक्तिशाली असुर था। जिसने घोर तपस्या करके ब्रह्माजी से एक विशेष वरदान प्राप्त किया था कि न उसे कोई मनुष्य मार सके, न कोई पशु, न अंदर मारा जा सके, न बाहर, न दिन में मारा जा सके, न रात में और किसी अस्त्र शस्त्र से भी उसकी मृत्यु न हो सके। ऐसा वरदान मिलने के कारण उसने अहंकार में खुद को ईश्वर बताना शुरू कर दिया और अपने राज्य में किसी भी व्यक्ति को भगवान विष्णु की पूजा करने से मना कर दिया।
हिरण्यकश्यप का एक प्रह्लाद नामक पुत्र था जो बचपन से भी भगवान विष्णु की भक्ति करता था और उनका परम भक्त बन गया। प्रह्लाद हमेशा विष्णुजी का स्मरण करता रहता था और उसके मुख भी पर केवल प्रभु का नाम था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को विष्णुजी की भक्ति से दूर रखने के लिए कई बार प्रयत्न किए। लेकिन फिर भी असुर कुल में जन्म लेने के बाद भी प्रह्लाद ने कभी भी भगवान श्रीविष्णु की भक्ति करना नहीं छोड़ा। महर्षि व्यास रचित, विष्णु पुराण में बताया गया है कि, हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को विषैले सांपों के पास छोड़ा, हाथियों के पैरों के नीचे डाला, ऊंचे पर्वत से नीचे गिरवाया और गहरे समुद्र तक में भी डुबोया। लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त को हर मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकाल दिया।
सभी प्रयास नाकाम होने के पश्चात हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया जिसे अग्नि में कभी न जलने का वरदान प्राप्त था। उसे प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर चिता पर बैठने को कहा गया और होलिका ने ठीक ऐसा ही किया। वह भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठाकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन उस समय भी प्रह्लाद जरा भी न डरा और मन में केवल श्रीहरी का स्मरण करता रहा है। ऐसे में अपने वरदान को गलत तरीके से प्रयोग करने के कारण होलिका उसी अग्नि में जलकर भस्म हो गई। ब्रह्माजी के प्राप्त अग्नि से रक्षा करने वाला चादर उड़कर प्रह्लाद के ऊपर आ गया। ऐसे में होलिका जल गई और भगवान विष्णु की कृपा से उनका भक्त प्रह्लाद सुरक्षित अग्नि से बाहर निकल आया। इसी दिन को याद करते हुए होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन माना गया। इस घटने के बाद प्रभु भक्तों में भगवान का आभार प्रकट किया और होलिका की चिता के राख और रंगों से रंगोत्सव मनाया। इसलिए होलिका दहन के अगले दिन रंगोत्सव का त्योहार मनाया जाता है।
