Tulsi Vivah Me Kya Karna Chahiye: तुलसी विवाह सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे और शालिग्राम भगवान का विवाह कराया जाता है। एक आम विवाह की तरह ही तुलसी विवाह भी पूरे रीति रिवाज के साथ कराया जाता है। कहते हैं तुलसी विवाह कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है। चलिए आपको बताते हैं तुलसी विवाह के दिन क्या करना चाहिए।
Tulsi Vivah Me Kya Karna Chahiye
तुलसी माता का विवाह किसके साथ हुआ था (Tulsi Vivah Kiske Sath Hua Tha)
तुलसी जी अपने पूर्व जन्म में वृंदा नाम की एक स्त्री थीं। जिनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हुआ था। कहते हैं भगवान विष्णु के छल के कारण वृंदा के पति की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्थर का बन जाने का श्राप दिया। कहते हैं श्री हरि विष्णु का यही पत्थर रूप शालिग्राम भगवान के नाम से लोकप्रिय हुआ। तुलसी विवाह के दिन शालिग्राम जी का ही तुलसी के साथ विवाह कराया जाता है।
तुलसी विवाह के दिन क्या करना चाहिए (Tulsi Vivah Me Kya Karna Chahiye)
-तुलसी विवाह की सुबह तुलसी के पौधे और गमले को अच्छे से साफ करें।
-इसके बाद उस पर गंगाजल का छिड़काव करें।
-फिर गमले को फूलों और रोली से सजाएं।
-तुलसी जी के गमले में शालिग्राम शिला रखें।
-शालिग्राम शिला को भी गंगाजल से स्नान कराएं और फूलों और रोली से सजाएं।
-तुलसी विवाह के लिए मंडप तैयार करें।
-मंडप को फूलों और रंगोली से सजाएं।
-फिर शुभ मुहूर्त में तुलसी और शालिग्राम का विवाह संपन्न करें।
-विवाह के दौरान मंत्रों का जाप जरूर करें। साथ ही तुलसी विवाह की कथा भी सुनें।
-विवाह के बाद तुलसी और शालिग्राम को प्रसाद चढ़ाएं।
-तुलसी विवाह के दिन दान भी जरूर करें।
तुलसी विवाह के दिन क्या नहीं करना है (Tulsi Vivah Ke Din Kya Nahi Karna Hai)
तुलसी विवाह के दिन तुलसी की पत्तियों को न तोड़ें। विवाह के दिन मांस, मछली, अंडे और शराब का सेवन भूलकर भी न करें। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। किसी से झगड़ा न करें।
