Tulsi Vivah Katha In Hindi: तुलसी जी का विवाह शालिग्राम भगवान के साथ क्यों कराया जाता है, जानिए तुलसी विवाह की पौराणिक कथा

Tulsi Vivah Katha In Hindi: तुलसी विवाह के दिन तुलसी माता का विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम जी के साथ कराया जाता है। इस दौरन तुलसी विवाह की कथा भी जरूर सुनी जाती है।

Tulsi Vivah Katha In Hindi: तुलसी विवाह का आयोजन बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे घर परिवार में सुख-समृद्धि आती है। कोई तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी के दिन कराता है तो कोई इसके अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को तुलसी विवाह कराता है। तो वहीं कुछ लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन भी तुलसी विवाह कराते हैं। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 15 नवंबर को है। तुलसी विवाह के समय ये पौराणिक कथा जरूर पढ़नी चाहिए।

Tulsi Vivah Katha In Hindi

Tulsi Vivah Katha In Hindi

तुलसी विवाह की कथा (Tulsi Vivah Ki Katha)

पौराणिक कथाओं अनुसार वृंदा नाम की एक लड़की थी जिसका विवाह राक्षस कुल में दानव राजा जलंधर से हुआ था। वृंदा एक पतिव्रता स्त्री थी जो अपने पति से बेहद प्रेम करती थी। एक बार देवताओं और दानवों में जब युद्ध छिड़ गया तो जलंधर को भी उस युद्ध में जाना पड़ रहा था। तब वृंदा ने अपने पति से कहा कि मैं युद्ध में आपकी जीत के लिए अनुष्ठान करुंगी और जब तक आप वापस नहीं लौट आते मैं अपना संकल्प नहीं छोडूगीं। इसके बाद जलंधर युद्ध में चला गया। वृंदा के व्रत के प्रभाव से जलंधर देवताओं पर भारी पड़ने लगा था। जब देवताओं को ये समझ आ गया कि जालंधर को हरा पाना काफी मुश्किल है तो वे भगवान विष्णु जी के पास गए। तब भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धरा और वृंदा के महल में पहुंच गए। जैसे ही वृंदा की नजर अपने पति पर पड़ी वे तुरंत ही पूजा से ऊठ गई और उसने जलंधर का रूप धरे भगवान विष्णु के चरण छू लिए।

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