Totke For Foreign Travel: सात समंदर पार जाकर करियर बनाने का सपना यूं तो आज नई जनरेशन स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही देखना शुरू कर देती है। कुछ बच्चे तो कॉलेज की पढ़ाई भी विदेश की यूनिवर्सिटी से ही करना चाहते हैं। तो कुछ लोग देश में नौकरी करते हुए विदेश में नौकरी करने का ख्वाब देखने लगते हैं। इसके पीछे कारण चाहे जो रहा हो लेकिन बार-बार प्रयास करने के बाद अगर आपका विदेश जाने का सपना किसी बाधा के कारण टूट रहा है तो कुछ है जो आपसे छूट रहा है।
काले घाेड़े की नाल का कमाल।
विदेशी धरती पर तरक्की की राह काबिलियत के साथ विशेष उपाय करने से मिल सकती है। पंडित वैभव जोशी के अनुसार विदेश जाने की बात भर से लोगों की नजरें लगने लगती हैं। जिसके कारण कोई न कोई बाधा आपका रास्ता रोक देती है। ऐसे में एक आसान सा उपाय आपकी मदद कर सकता है।
काले घोड़े की नाल से उपाय
यदि आपके विदेश जाने में बार-बार बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं या अकारण ही आपको विदेश जाने में विलंब हो रहा है और लाख प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिल रही तो इस विधि को अपनाकर अपने मार्ग की रुकावटों को आप दूर कर सकते हैं।
सामग्रीः
मंत्र सिद्धि प्राण− प्रतिष्ठित काले घाेड़े की नाल, काले रंग का वस्त्र, असली सिंदूर, थाली, इत्र, पुष्प, धूप, अगरबत्ती, तेल का दीपक, जलपात्र, साबुत चावल, लकड़ी की चौकी, सिद्ध शनि यंत्र।
विधि
माला- हकीक की माला।
दिन- शनिवार पुष्य नक्षत्र
समय- रात्रिकाल
दिशा- पश्चिम दिशा
धारणीय वस्त्र- लाल रंग की धाेती
आसन- काला कंबल
जप संख्या- 27 हजार बार
अवधि- 27 दिन तक
मंत्र-
ऊं नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
उपाय की विधि
किसी भी शनिपुष्य योग में यह प्रयोग आरंभ किया जा सकता है। रात्रि स्नानादि से निवृत्त होकर लाल रंग की धाेती पहनकर काले कंबल पर पश्चिमाभिमुखी होकर बैठ जाएं। लकड़ी की चौकी पर काले रंग का कपड़ा बिछाकर एक थाली में मंत्र सिद्धि शनि यंत्र प्राण प्रतिष्ठिा करें। अब काले घाेड़े की नाल स्थापित करके असली सिंदूर लगाकर पूजा करें। इत्र लगाएं, पुष्प अर्पित करें, धूप अगरबत्ती जलाएं और तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद मंत्रसिद्ध चैतन्य काली हकीक माला से उपरोक्त मंत्र का जाप करें।
27 दिनों में उपरोत्क मंत्र का कुल 27 हजार जाप पूर्ण होना आवश्यक है। 27 दिनोें के बाद प्रयोग पूरा हो जाने पर मंत्रसिद्ध चैतन्य काली हकीक माला को अपने गले में धारण कर लें और काले घोड़े की नाल को घर के मुख्य दरवाजे की चौखट पर स्थापित कर दें। शेष पूजन सामग्री को काले वस्त्र की पोटली में बांधकर किसी पीपल के वृक्ष की जड़ में समर्पित कर दें और बिना पीछे मुड़कर देखे घर वापस आ जाएं। ध्यान रहे कि साधना काल के दौरान आहार विहार सात्विक रहे और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
