Aaj Ka Panchang: 14 नवंबर 2025, शुक्रवार का दिन, हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि से शुरू होगा, जो 15 नवंबर सुबह 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगी, इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी। यह दिन मार्गशीर्ष मास का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष शुभ है।
14 नवंबर का पंचांग
आज पूजा का शुभ समय क्या है, इसको आज के पंचांग से जान सकते हैं। आज नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी शाम 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, फिर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रभावी होगा। योग में वैधृति 15 नवंबर सुबह 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, इसके बाद विष्कम्भ योग शुरू होगा। करण में वणिज दोपहर 12 बजकर 7 मिनट तक, विष्टि 15 नवंबर सुबह 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। पंचांग के माध्यम से आप दिन के शुभ और अशुभ काल का पता लगा सकते हैं।
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
सूर्य आज सुबह 6 बजकर 43 मिनट पर उदय होगा और शाम 5 बजकर 28 मिनट पर अस्त होगा। चंद्रमा 15 नवंबर सुबह 2 बजकर 15 मिनट पर उदय होगा और दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर अस्त होगा। दिन की अवधि 10 घंटे 44 मिनट 57 सेकंड रहेगी, जबकि रात की अवधि 13 घंटे 15 मिनट 50 सेकंड होगी। मध्याह्न दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर होगा।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण
आज की तिथि कृष्ण दशमी 15 नवंबर सुबह 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगी, इसके बाद कृष्ण एकादशी शुरू होगी। नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी शाम 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, फिर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र लगेगा। पूर्वाफाल्गुनी का पहला पाद सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक, दूसरा पाद दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक और तीसरा पाद शाम 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 15 नवंबर सुबह 3 बजकर 51 मिनट तक प्रभावी रहेगा। योग में वैधृति 15 नवंबर सुबह 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, फिर विष्कम्भ योग शुरू होगा। करण में वणिज दोपहर 12 बजकर 7 मिनट तक, विष्टि 15 नवंबर सुबह 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर
विक्रम संवत 2082 कालयुक्त, शक संवत 1947 विश्वावसु और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त 25 अप्रैल 2025 को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगा, फिर सिद्धार्थी शुरू होगा। चंद्र मास मार्गशीर्ष पूर्णिमांत में है, जबकि अमांत में कार्तिक है। प्रविष्टे/गते 29 है।
राशि और नक्षत्र
चंद्र राशि सिंह 15 नवंबर सुबह 3 बजकर 51 मिनट तक रहेगी, फिर कन्या में प्रवेश करेगा। सूर्य राशि तुला में है और सूर्य विशाखा नक्षत्र 15 नवंबर सुबह 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, फिर विशाखा में रहेगा। पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सौंदर्य, वैभव और नेतृत्व की ऊर्जा देंगे।
ऋतु और अयन
ऋतु शरद (वैदिक) और हेमंत (द्रिक) है। अयन दक्षिणायन है। मौसम ठंडा रहेगा, रात में ठंडक और बढ़ जाएगी।
14 नवंबर का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:57 से 5:50 बजे तक (ध्यान और पूजा के लिए उत्तम)
- प्रातः संध्या: सुबह 5:23 से 6:43 बजे तक (स्पिरिचुअल कार्यों के लिए शुभ)
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:27 बजे तक (महत्वपूर्ण कार्यों के लिए फेवरेबल)
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:53 से 2:36 बजे तक (नए काम शुरू करने के लिए अच्छा)
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:28 से 5:54 बजे तक (पूजा और फैमिली टाइम के लिए शुभ)
- सायाह्न संध्या: शाम 5:28 से 6:47 बजे तक (भक्ति कार्यों के लिए बेस्ट)
- अमृत काल: दोपहर 2:29 से 4:12 बजे तक (शुभ कार्यों के लिए अनुकूल)
- निशिता मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 15 नवंबर सुबह 12:32 बजे तक (रात की पूजा के लिए उत्तम)
14 नवंबर का अशुभ समय
- राहुकाल: सुबह 10:45 से दोपहर 12:05 बजे तक (बड़े फैसले या नए काम से बचें)
- यमगण्ड: दोपहर 2:47 से 4:07 बजे तक (जोखिम भरे कामों से बचें)
- गुलिक काल: सुबह 8:04 से 9:24 बजे तक (सावधानी बरतें)
- आडल योग: शाम 6:35 से 15 नवंबर सुबह 6:42 बजे तक (अशुभ)
- दुर्मुहूर्त: सुबह 8:52 से 9:35 बजे तक और दोपहर 12:27 से 1:10 बजे तक (काम शुरू करने से बचें)
- वर्ज्य: 15 नवंबर सुबह 5:13 से 6:57 बजे तक
- भद्रा: दोपहर 12:07 से 15 नवंबर सुबह 12:49 बजे तक
- गण्ड मूल: पूरे दिन
- बाण: मृत्यु − दोपहर 2:06 बजे से पूर्ण रात्रि तक
आनंदादि और तमिल योग
आनंदादि योग में सिद्धि शाम 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, फिर शुभ शुरू होगा। तमिल योग में अमृत शाम 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, फिर सिद्ध शुरू होगा। जीवनम में अर्ध जीवन और नेत्रम में एक नेत्र रहेगा।
निवास और शूल
होमाहुति राहु को दी जाएगी। दिशा शूल पश्चिम दिशा में है, इस दिशा में यात्रा से बचें। चंद्र वास पूर्व 15 नवंबर सुबह 3 बजकर 51 मिनट तक, फिर दक्षिण रहेगा। अग्निवास पृथ्वी 15 नवंबर सुबह 12 बजकर 49 मिनट तक, फिर आकाश पर रहेगा। भद्रावास मृत्यु दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से 15 नवंबर सुबह 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। राहु वास दक्षिण-पूर्व में रहेगा। शिववास क्रीड़ा में 15 नवंबर सुबह 12 बजकर 49 मिनट तक, फिर कैलाश पर रहेगा। कुंभ चक्र तल में रहेगा।
