Skanda Sashti 2026 Date: हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का खास महत्व है। इस दिन शिव जी और माता गौरी के बेटे कार्तिकेय भगवान की पूजा की जाती है। हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन इस खास पूजा को किया जाता है। कहते हैं कि इसे करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। यहां से आप जान सकते हैं कि साल 2026 में स्कंद षष्ठी कब है और इसकी पूजा का मुहूर्त क्या है। साथ ही यहां कार्तिकेय प्रभु की पूजा की पूरी विधि भी बताई गई है।
स्कंद षष्ठी कब है 2026 में?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रारंभ 22 फरवरी को सुबह में 11 बजकर 9 मिनट पर होगा। यह तिथि 23 फरवरी को सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। ऐसे में स्कंद षष्ठी का व्रत 22 फरवरी मंगलवार को रखा जाएगा।
स्कंद षष्ठी पूजा मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त- 05:12 ए एम से 06:03 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:12 पी एम से 12:58 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:14 पी एम से 06:39 पी एम
- अमृत काल- 11:04 ए एम से 12:35 पी एम
- सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:53 ए एम से 05:54 पी एम
- प्रातः सन्ध्या- 05:38 ए एम से 06:53 ए एम
- विजय मुहूर्त- 02:29 पी एम से 03:14 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 06:16 पी एम से 07:32 पी एम
- रवि योग- 05:54 पी एम से 06:52 ए एम, फरवरी 23
स्कंद षष्ठी की कथा
पौराणिक कथा अनुसार एक बार भगवान और माता पार्वती कैलाश पर्वत से मलिक्कार्जुन चले गए थे और इसी का फायदा उठाते हुए तारकासुर राक्षस ने देवलोक में हमला कर सभी देवताओं को बंदी बना लिया था। तारकासुर के आतंक से परेशान होकर सभी देवताओं ने मुरुगन यानि की भगवान् कार्तिकेय का आहवान किया। इसके बाद देवताओं की रक्षा के लिए कार्तिकेय देवलोक पहुंचें और जिस दिन भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया उस दिन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि थी। इसलिए ही इस तिथि पर भगवान् मुरुगन की पूजा आराधना की जाने लगी।
स्कंद षष्ठी पूजा विधि
स्कंद षष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके नए वस्त्र धारण करें। फिर मुरुगन (भगवान् कार्तिकेय) की मूर्ति या फोटो स्थापित करें और अपना मुख दक्षिण दिशा की तरफ करके पूजा में बैठ जाएं। पूजन की समाग्रियों में दही और दूध जरूर शामिल करें। भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें। फिर भगवान को फूल माला, चंदन, वस्त्र, सिंदूर, कलावा और अक्षत अर्पित करें। मंदिर में घी का दीपक जलाएं। स्कन्द षष्ठी की कथा पढ़ने के बाद भगवान कार्तिकेय की आरती करें। प्रभु को भोग लगाकर क्षमा प्रार्थना करें। यदि आपने व्रत रखा है तो लहसुन, प्याज, शराब और मांस-मछली का सेवन बिल्कुल भी न करें। इस दिन व्रतियों को विशेष रूप से ब्राह्मी का रस और घी का सेवन जरूर करना चाहिए। इसके अलावा रात के समय जमीन पर सोना चाहिए। फिर अगले दिन सुबह स्नान के बाद गवान कार्तिकेय की पूजा करने के बाद व्रत खोल लेना चाहिए।
