Sheetala Mata Ki Aarti, Basoda Aarti: शीतला सप्तमी (Shitla Saptami), शीतला अष्टमी (Shitla Ashtami) और बसोड़ा (Basoda) माता शीतला को समर्पित एक लोकप्रिय त्यौहार है। धार्मित मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी शीतला की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को चेचक, फोड़े, फुंसी, खसरा आदि रोगों से राहत मिलती है। इस पर्व वाले दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। फिर यही भोजन प्रसाद स्वरूप खुद भी ग्रहण किया जाता है। इस पर्व के बाद से गर्मी बढ़ने के कारण बासी भोजन खाने की मनाही हो जाती है।
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता..शीतला माता की आरती यहां पढ़ें
बसोड़ा पूजा या शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा के बाद उनकी आरती जरूर करें। कहते हैं आरती करने से पूजा संपन्न हो जाती है और व्यक्ति को उस पूजा का शुभ फल जल्द ही प्राप्त होता है। आगे जानिए माता शीतला की आरती लिरिक्स हिंदी में।
Sheetala Mata Ki Aarti (शीतला माता की आरती)
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता ॥ जय
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता,
ऋद्धि सिद्धि मिल चँवर डोलावें, जगमग छवि छाता ॥ जय
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता॥ जय
इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,
सूरज ताल बजावै नारद मुनि गाता॥ जय
घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,
करै भक्त जन आरती लखि लखि हर्षाता ॥ जय
ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देती मातु पिता भ्राता ॥ जय॥
जो जन ध्यान लगावे प्रेम शक्ति पाता,
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता ।॥ जय
रोगों से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता॥ जय
बांझ पुत्र को पावे दारिद्र कट जाता,
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछताता ॥ जय
शीतल करती जन की तू ही है जग त्राता,
उत्पत्ति बाला बिनाशन तू सब की माता॥ जय
दास नारायण कर जोरी माता,
भक्ति आपनी दीजैं और न कुछ माता॥ जय
