Shaligram Bhagwan Ki Aarti: शालिग्राम सुनो विनती मेरी... तुलसी विवाह पर जरूर करें शालिग्राम भगवान की आरती, देखें शालिग्राम जी की आरती लिरिक्स

Shaligram Bhagwan Ki Aarti (Tulsi Vivah Aarti) शालिग्राम सुनो विनती मेरी, Shaligram Bhagwan Ji Ki Aarti 2025: शालिग्राम जी भगवान श्री हरि विष्णु का ही स्वरूप माने जाते हैं। तुलसी विवाह के दिन शालिग्राम भगवान की आरती जरूर की जाती है और इसलिए यहां हम आपके लिए शालिग्राम आपकी के लिरिक्स लेकर आए हैं।

Shaligram Bhagwan Ki Aarti (शालिग्राम भगवान की आरती लिरिक्स): कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन शालिग्राम भगवान के साथ माता तुलसी का विवाह कराया जाता है। आज वही तुलसी विवाह का खास दिन है। आज माता तुलसी और शालिग्राम भगवान के विवाह के बाद चालीसा और स्त्रोत पढ़ा जाता है और आखिर में आरती जरूर की जाती है। यहां से आप शालिग्राम भगवान की आरती देख सकते हैं। यहां शालिग्राम जी की आरती का पूरा लिरिक्स मौजूद है।

shaligram ji ki aarti lyrics in hindi

शालिग्राम भगवान की आरती (pic credit: iStock)

Shaligram Ji Ki Aarti (शालिग्राम भगवान की आरती)-

शालिग्राम सुनो विनती मेरी ।

यह वरदान दयाकर पाऊं ॥

प्रात: समय उठी मंजन करके ।

प्रेम सहित स्नान कराऊँ ॥

चन्दन धुप दीप तुलसीदल ।

वरन -वरण के पुष्प चढ़ाऊँ ॥

तुम्हरे सामने नृत्य करूँ नित ।

प्रभु घंटा शंख मृदंग बजाऊं ॥

चरण धोय चरणामृत लेकर ।

कुटुंब सहित बैकुण्ठ सिधारूं ॥

जो कुछ रुखा सूखा घर में ।

भोग लगाकर भोजन पाऊं ॥

मन वचन कर्म से पाप किये ।

जो परिक्रमा के साथ बहाऊँ ॥

ऐसी कृपा करो मुझ पर ।

जम के द्वारे जाने न पाऊं ॥

माधोदास की विनती यही है ।

हरी दासन को दास कहाऊं ॥

॥ इति श्री शालिग्राम आरती संपूर्णम् ॥

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