Sawan Kalashtami Vrat 2025 Puja Muhurat, Vidhi, Mantra, Aarti: आजकालाष्टमी है। आज के दिन काल भैरव देव की पूजा रात्रि में की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार की चिंताएं, रोग, दुख, पीड़ाएं और शारीरिक और मानसिक परेशानियां दूर हो जाती हैं। यहां से आप आज की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा की संपूर्ण विधि, काल भैरव के मंत्र और आरती के लिरिक्स देख सकते हैं।
कालाष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त-
सावन महीने की कालाष्टमी आज, 17 जुलाई को मनाई जा रही है। कालाष्टमी की तिथि का प्रारंभ 17 जुलाई को शाम 07:08 बजे से होगा और इसका समापन 18 जुलाई, शुक्रवार को शाम 5:01 बजे होगा।
कालाष्टमी पूजा विधि-
कालाष्टमी का दिन ब्रह्म बेला में उठकर काल भैरव दैव को प्रणाम किया जाता है। इसके बाद मैं घर की सफाई की जाती है। अपने दैनिक कार्यों को पूरा करने के बाद गंगा जल से स्नान करें। उसके बाद साफ कपड़े पहनकर सूर्य देवता को जल अर्पित करें। पंचोपचार करने के बाद पंचामृत, दूध, दही, बिल्व पत्र, धतूरे, फल, फूल, धूप आदि से काल भैरव देव की पूजा करें। इस समय भैरव कवच का पाठ करें और मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में आरती करें और सुख-समृद्धि और धन-संपदा की प्रार्थना करें। रात में स्नान-ध्यान के बाद विधि- विधान से रात्रि पूजा करें। उसके बाद रात के समय भजन करें।
कालाष्टमी पूजा मंत्र-
शिवपुराण में कालभैरव की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करना बेहद फलदायी माना गया है।
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!
अन्य मंत्र-
ओम भयहरणं च भैरव:।
ओम कालभैरवाय नम:।
ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।
ओम भ्रं कालभैरवाय फट्।
कालाष्टमी पूजा आरती-
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।
तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी।।
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।
चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।।
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।
कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।।
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।।
बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावें।
कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावें।।
