Sawan 2026 Last Somwar Mahakal Sawari: श्रावण मास के चौथे और अंतिम सोमवार को सोमवार की शाम उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकली गई। राजसी ठाठ-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकले भगवान महाकाल के दर्शन के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। हर तरफ बाबा महाकाल के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालु घंटों पहले से ही सवारी मार्ग पर बाबा की एक झलक पाने के लिए डटे रहे।
महाकाल की निकली सवारी
इस बार बाबा महाकाल ने सवारी में चार अलग-अलग स्वरूपों में प्रजा को दर्शन दिए। चांदी की पालकी में भगवान चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मन महेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव और नंदी रथ पर उमा महेश के स्वरूप में बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर निकले।
मंदिर से निकलते ही मिला गार्ड ऑफ ऑनर
शाम करीब 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से सवारी की शुरुआत हुई। पूजन के बाद बाबा महाकाल को चांदी की पालकी में विराजमान कर मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर पुलिस बैंड और जवानों की टुकड़ी ने बाबा महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इसके बाद घोड़े, पुलिस बल, बैंड और भजन मंडलियों के साथ सवारी आगे बढ़ी। पूरे मार्ग पर श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर बाबा महाकाल का स्वागत किया।
करीब 8 किलोमीटर का रहा सवारी मार्ग
बाबा महाकाल की सवारी पारंपरिक मार्ग से होते हुए करीब 8 किलोमीटर का सफर तय कर रामघाट पहुंची। सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां मां क्षिप्रा के तट पर भगवान महाकाल का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार सवारी के दौरान बाबा महाकाल के क्षिप्रा तट पहुंचने और वहां पूजन की परंपरा का विशेष महत्व है। रामघाट पर पूजा के बाद सवारी फिर मंदिर की ओर रवाना हुई।
इन रास्तों से होकर मंदिर लौटी सवारी
रामघाट से वापसी के दौरान सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। कई जगह लोगों ने घरों और प्रतिष्ठानों से बाबा महाकाल की सवारी पर पुष्प बरसाए।
राजा के रूप में नगर भ्रमण पर निकलते हैं महाकाल
धार्मिक मान्यता है कि श्रावण और भाद्रपद मास में बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए सवारी के रूप में नगर भ्रमण पर निकलते हैं। उज्जैन में महाकाल को नगर का राजा माना जाता है। यही वजह है कि सवारी के दौरान श्रद्धालुओं में बाबा के प्रति विशेष आस्था और उत्साह देखने को मिलता है। भक्तों के लिए बाबा महाकाल की एक झलक पाना ही इस सवारी का सबसे बड़ा आकर्षण रहता है। सवारी के मार्ग पर हजारों श्रद्धालु घंटों इंतजार करते हैं और बाबा के दर्शन के साथ जयकारे लगाते हैं।
लाइव दर्शन की भी रही व्यवस्था
सवारी में शामिल श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन आसानी से हो सकें, इसके लिए मंदिर प्रबंध समिति की ओर से लाइव प्रसारण की व्यवस्था भी की गई। सवारी का सजीव प्रसारण मंदिर प्रबंध समिति के फेसबुक पेज पर किया गया। इसके अलावा सवारी के साथ चल रहे विशेष चलित रथ में एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी। इसके जरिए सवारी मार्ग पर खड़े श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल की सवारी के लाइव दर्शन कराए गए। चलित रथ में लाइव बॉक्स की व्यवस्था की गई थी, जिससे सवारी के दौरान होने वाले दर्शन का सीधा प्रसारण संभव हुआ।
जयकारों से गूंजती रही महाकाल की नगरी
अंतिम सोमवार की सवारी को लेकर उज्जैन में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। शाम को जैसे ही बाबा महाकाल राजसी स्वरूप में नगर भ्रमण के लिए निकले, पूरा सवारी मार्ग ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अपने आराध्य राजा के नगर भ्रमण का अवसर रहा। चार स्वरूपों में बाबा महाकाल के दर्शन और क्षिप्रा तट पर पूजन के साथ श्रावण मास की सवारी परंपरा का यह अंतिम सोमवार भक्ति और आस्था के माहौल में संपन्न हुआ।
