Sawan 2026 Last Saturday Remedies : सावन 2026 का आखिरी शनिवार 22 अगस्त को पड़ रहा है। सावन भगवान शिव की आराधना का महीना है और शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय परंपरा में भगवान शिव को शनिदेव का गुरु माना जाता है। ऐसे में सावन के अंतिम शनिवार को शिवलिंग की पूजा करना शनि से जुड़ी परेशानियों के लिए विशेष उपाय माना जाता है।
शनि प्रकोप से मुक्ति के उपाय
जिन लोगों की कुंडली में शनि की महादशा या अंतरदशा चल रही है, अथवा जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं, उनके लिए यह दिन शिव आराधना के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। ज्योतिष में शनि को कर्म, न्याय, अनुशासन, देरी और जिम्मेदारियों का कारक माना गया है। शनि हमेशा नुकसान देने वाले ग्रह नहीं हैं। कुंडली में मजबूत और शुभ स्थिति होने पर यही ग्रह व्यक्ति को मेहनत, पद, प्रतिष्ठा और स्थायी सफलता भी दे सकता है।
सावन के अंतिम शनिवार को किए जाने वाले उपायों में मुख्य भाव शनि के डर से बचना नहीं, बल्कि भगवान शिव की शरण में जाकर अपने कर्मों को सुधारने और शनि की कृपा प्राप्त करने का है।
भगवान शिव के भक्त हैं शनिदेव
शनिदेव खुद भगवान शिव के परम भक्त हैं। इसके साथ ही कुछ पुराणों में भगवान शिव को शनिदेव का गुरु भी बताया गया है। इस कारण भगवान शिव का पूजन शनि से होने वाली परेशानी को दूर करता है। अगर भगवान शिव की नियम से पूजा की जाए तो शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के असर से बचा जा सकता है।
सावन का आखिरी शनिवार क्यों है खास
उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को समाप्त हो रहा है। 22 अगस्त इस श्रावण मास का अंतिम शनिवार है। सावन का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस कारण अंतिम शनिवार को शिव का पूजन शनि के वक्र दृष्टि से उत्पन्न परेशानियों का अंत करता है। आइए जानते हैं, इस दिन भगवान शिव की पूजा कैसे करनी चाहिए।
शिवलिंग का काले तिल मिले जल से करें अभिषेक
22 अगस्त को सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव के मंदिर जाएं। सबसे पहले स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद जल में थोड़े काले तिल डालकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इस दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। इस उपाय को करने से साढ़ेसाती और ढैय्या का असर कम होता है।
शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाएं
शनि से जुड़े उपायों में शमी का विशेष महत्व माना जाता है। सावन के आखिरी शनिवार को शिवलिंग पर शमी पत्र भी अर्पित करें और दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें। मान्यता है कि राजा दशरथ ने शनिदेव की स्तुति की थी। जिसे दशरथकृत शनि स्तोत्र के नाम से जाना जाता है। इस दिन इसका पाठ अवश्य करना चाहिए।
काले तिल और उड़द का दान करें
सावन के आखिरी शनिवार को काले तिल, काली उड़द या जरूरतमंद व्यक्ति के उपयोग की वस्तुओं का दान करें। पद्म पुराण के अनुसार राजा दशरथ ने शनि के प्रकोप से मुक्ति के लिए काले तिल, उड़द, लोहा आदि से संबंधित दान किया था।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
