1st Mangla Gauri Vrat 2026 Today: हिन्दू धर्म में मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है, जिसकी पूजा सावन के प्रत्येक मंगलवार के दिन की जाती है। इस बार 30 जुलाई से लेकर 28 अगस्त 2026 तक सावन रहेगा, जिस दौरान कुल 4 मंगलवार पड़ेंगे। ऐसे में पहला मंगला गौरी व्रत आज 4 अगस्त 2026 को रखा जा रहा है, जिसके बाद 11 अगस्त को दूसरा, 18 अगस्त को तीसरा और 25 अगस्त को चौथा उपवास रखा जाएगा। ज्यादातर ये व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, खुशहाल वैवाहिक जीवन और घर की सुख-शांति के लिए रखती हैं। हालांकि, आज के समय में कुंवारी कन्याएं भी योग्य पति की चाह में ये व्रत रख रही हैं।
आज पहले मंगला गौरी व्रत पर जपें ये प्रभावशाली मंत्र
इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ देवों के देव महादेव की पत्नी माता पार्वती के गौरी रूप की पूजा की जाती है। आज यहां पर आप पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, पूजन मंत्र और उपवास से जुड़े नियमों के बारे में जानेंगे।
पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:20 बजे से 05:02 बजे तक
- प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:41 बजे से 05:44 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 बजे से 03:35 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:10 बजे से 07:31 बजे तक
- सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:10 बजे से 08:13 बजे तक
- अमृत काल: शाम 07:30 बजे से 09:06 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: मध्य रात्रि 12:06 बजे से 12:48 बजे तक (5 अगस्त)
पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद लाल, पीले या हरे रंग के कपड़े धारण करें।
- पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़कें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें, जिसके ऊपर 5 या 7 आम के पत्तों पर नारियल रखें। नारियल पर 3 बार कलावा जरूर बांधें।
- अब मां गौरी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- व्रत का संकल्प लेने के बाद घी का दीपक जलाएं।
- देवी को हल्दी, कुमकुम, अक्षत, वस्त्र, सुहाग की 16 चीजें, फल, फूल और मिठाई अर्पित करें। इस दौरान 'ॐ मंगला गौरयै नम:' मंत्र का 3, 7, 11 या 108 बार जाप करें।
- मंगला गौरी व्रत की कथा पढ़ें।
- आरती करके पूजा का समापन करें।
- शाम में पूजा करने के बाद या अगले दिन सूर्योदय के बाद आप अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।
मंगला गौरी व्रत पर कौन से मंत्र जपें?
- बीज मंत्र:ॐ मंगला गौरयै नम:
- शिव-पार्वती संयुक्त मंत्र: ॐ उमामहेश्वराय नम:
- महामंत्र: सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
- अखंड सौभाग्य और प्रार्थना मंत्र: ॐ गौरी शंकरार्द्धांगी देवी हिमालय रानी। जय जय जय मंगला गौरी पतिव्रता भवानी।।
- ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
मंगला गौरी व्रत से जुड़े नियम
यदि आप आज पहला मंगला गौरी व्रत रख रही हैं तो पूजा शुरू करने से पहले उपवास का संकल्प लें। व्रत के दिन दोपहर के समय सोने की जगह माता रानी का ध्यान करें। दिनभर तन के साथ-साथ मन से भी शुद्ध रहें। व्रत का पारण सात्विक चीजों का सेवन करके ही करें। बता दें कि मंगला गौरी व्रत लगातार 5 वर्षों तक रखने जरूरी होते हैं, इसलिए इन्हें बीच में न तोड़ें।
