Saphala Ekadashi 2025: कल सफला एकादशी है और हिंदू धर्म में सफला एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और माना जाता है कि एकादशी का विधिपूर्वक पालन करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। लेकिन अगर व्रत के दौरान कुछ गलतियां हो जाएं, तो व्रत खंडित माना जाता है और उसका पूरा फल नहीं मिलता। इसलिए एकादशी के दिन खास सावधानी रखना जरूरी है। आइए जानते हैं वे 4 गलतियां, जो एकादशी पर भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
सफला एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए (pic credit: canva)
अन्न और चावल का सेवन करना
एकादशी के दिन सबसे बड़ी गलती अन्न या चावल खाना मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी पर चावल में पापों का वास माना गया है। यही कारण है कि इस दिन चावल, गेहूं, दाल और उनसे बने भोजन का सेवन वर्जित होता है। अगर आप निर्जला व्रत नहीं कर पा रहे हैं, तो फल, दूध, दही, साबूदाना या कुट्टू के आटे से बना भोजन कर सकते हैं, लेकिन अन्न से पूरी तरह परहेज करें।
बाल और नाखून काटना
एकादशी के दिन बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना या नाखून काटना भी व्रत के नियमों के विरुद्ध माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से पुण्य नष्ट होता है और व्रत का प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए एकादशी से एक दिन पहले ही ये सभी कार्य कर लेने चाहिए।
गुस्सा और झूठ
एकादशी सिर्फ उपवास का ही नहीं, बल्कि मन और विचारों की शुद्धता का भी व्रत है। इस दिन क्रोध करना, झूठ बोलना, किसी की निंदा करना या किसी को दुख पहुंचाना व्रत को खंडित कर सकता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु को शांत और शुद्ध मन अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन संयम, धैर्य और सद्भाव बनाए रखना चाहिए।रात में जगना
एकादशी व्रत में रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व बताया गया है। अगर संभव हो तो भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए। पूजा-पाठ में लापरवाही करना, भगवान विष्णु को स्मरण न करना या व्रत केवल दिखावे के लिए रखना भी एक बड़ी भूल मानी जाती है।
एकादशी व्रत का सही तरीका
एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें। तुलसी दल अर्पित करें, दीप जलाएं और मन से व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक आचरण रखें और अगले दिन द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक व्रत खोलें।
