Sanskrit Shlokas For Success With Hindi Meaning : संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। हमारे अनेक धार्मिक ग्रंथ इसी भाषा में लिखे हैं। इसके अलावा संस्कृत में कुछ ऐसे श्लोक भी देखने को मिलते हैं, जो आपको सफलता की ओर अग्रसर करने का काम करते हैं। अनेक विद्वानों ने अपने मत संस्कृत में लिखे हैं, जो आपको सफलता की सीढ़ियां चढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं। आज ऐसे ही 5 संस्कृत श्लोक हम आपको बताने जा रहे हैं। जिनसे आप सफलता की ओर बढ़ने की प्रेरणा ले सकते हैं।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ- भगवत गीता से लिए गए इस श्लोक का अर्थ है "तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, इसलिए कर्म करो फल की चिंता मत करो। जीवन में हमेशा अच्छे कर्म करते रहो, सफलता अपने आप मिलेगी।"
विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
अर्थ - विद्या यानी ज्ञान से विनम्रता आती है, विनम्रता से पात्रता मिलती है, पात्रता से धन और धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है। अर्थात् जीवन में सुख चाहिए तो सबसे पहले आपको विद्या ग्रहण करने पर ध्यान देना चाहिए।
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:।।
अर्थ – उद्यम यानी मेहनत करने से ही सफलता मिलती है, सिर्फ मनोरथ यानी इच्छा करने से काम पूरे नहीं होते। जैसे सोते हुए शेर के मुंह में हिरण स्वयं नहीं आ जाता है, उसके खाने के लिए शेर को भी परिश्रम करना पड़ता है।
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।
क्षुरासन्नधारा निशिता दुरत्यद्दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥
अर्थ - उठो, जागो, और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो। तेरे रास्ते कठिन और अत्यंत दुर्गम भी हो सकते हैं, लेकिन सफलता प्राप्त लोगों का मत है कि कठिन रास्तों पर चलकर ही सफलता प्राप्त हो सकती है।
साहसं धर्म्यमर्थ्यं च यशसं चानपायिनम्।
सर्वत्र विजयायते धैर्येण महताम् बलम्॥
अर्थ- जीवन में धर्म का पालन करते हुए साहस रखने वाला, साहसिक कार्य करने वाला और हमेशा धैर्य रखने वालों को जीवन के सभी कामों में विजय (सफलता) मिलती है।
