Sandhi Puja Date 2023: पूरे भारत में दुर्गा पूजा उत्सव शुरू हो गया है। दुर्गा पूजा आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से शुरू होती है। शारदीय नवरात्रि में संधि पूजा अष्टमी और नवमी तिथि के बीच की जाती है। नवरात्रि के दौरान संधि पूजा का विशेष महत्व है। संधि पूजा अष्टमी के अंत और नवमी की शुरुआत तक की जाती है। इस दिन पारंपरिक परिधान और पारंपरिक तरीके से देवी की पूजा करने की परंपरा है। जानिए संधि पूजा का शुभ मुहू्र्त और डेट के बारे में।
Sandhi Puja Date
संधि पूजा डेट( Sandhi Puja Date 2023)
नवरात्रि पर संधि पूजा का विशेष महत्व है और यह अष्टमी तिथि समाप्त होने के 24 मिनट बाद तक और नवमी तिथि शुरू होने के 24 मिनट बाद तक की जाती है। इसका मतलब है कि भक्तों के पास इस पूजा के लिए 48 मिनट हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार संधि पूजा के लिए 22अक्टूबर की शाम 7 बजकर 34 मिनट के बाद है। इसके बाद ही संधि पूजा करना शुभ होगा।
संधि पूजा शुभ मुहूर्त ( Sandhi Puja Shubh Muhurat)
इस साल शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि का समापन 22 अक्टूबर को रात 7 बजकर 34 मिनट पर हो रहा है। संधि पूजा हमेशा अष्टमी और नवमी तिथि के बीच की जाती है। ऐसे में इस बार संधि पूजा 22 अक्टूबर की रात को 7 बजकर 34 मिनट से लेकर रात के 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
संधि पूजा विधि ( Sandhi Puja Vidhi)
संधि पूजा उचित अवसर पर शुरू करनी चाहिए और देवी दुर्गा को 108 दीपक और 108 कमल अर्पित करने चाहिए। इसके बाद 108 बेलपत्र भी चढ़ाएं। उसके बाद मां दुर्गा को लाल वस्त्र, लाल फल, फूल, चावल और सूखे मेवे चढ़ाएं और उन्हें आभूषण आदि पहनाकर पूरा सजाएं। धूपबत्ती से देवी मंत्र का जाप करने के बाद आरती करें। संधि पूजा की शुरुआत ढोल और घंटियों की थाप के साथ होती है।
संधि पूजा महत्व ( Importance Of Sandhi Puja)
यह पूजा अष्टमी और नवमी तिथि को शाम के समय की जाती है। चूंकि यह दो तिथियों का मेल है, इसलिए इसे संधि पूजा कहा जाता है। संधि पूजा अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के प्रारंभ होने के 24 मिनट बाद की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार माता चामुंडा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। तभी चंड और मुंड नाम के दो राक्षसों ने मां चामुंडा की पीठ पर हमला कर दिया, जिसके बाद मां का चेहरा क्रोध से नीला पड़ गया और मां ने दोनों राक्षसों का वध कर दिया। जिस समय उनकी हत्या हुई वह संधि काल का समय था। यह मुहूर्त बहुत शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि तब मां दुर्गा ने अपनी सारी शक्ति लगा कर चंड और मुण्ड का वध कर दिया था।
