Rath Saptami Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरा है रथ सप्तमी का व्रत, पढ़ें सांब और गणिका की कथा हिंदी में

Rath Saptami Vrat Katha In Hindi (रथ सप्तमी व्रत कथा): आज 25 जनवरी को रथ सप्तमी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन भगवान भास्कर यानी सूर्यदेव की पूजा की जाती है। माना जाता है इस व्रत की पूजन के दौरान कथा को पढ़ना या सुनना जरूरी होता है। इसके बिना व्रत का फल अधूरा रहता है। आइए जानते हैं रथ सप्तमी की व्रत कथा क्या है?

Rath Saptami Vrat Katha In Hindi (रथ सप्तमी व्रत कथा): सनातन धर्म में सूर्यदेव को जीवन का स्रोत और आरोग्य का प्रदाता माना गया है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला रथ सप्तमी पर्व विशेष रूप से सूर्य उपासना का पर्व है। इसे अचला सप्तमी भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर आकाश में प्रकट हुए थे। आज 25 जनवरी 2026 को रथ सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है।

रथ सप्तमी की व्रत कथा

रथ सप्तमी की व्रत कथा

यह पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, जीवन शक्ति, धन और संतान की प्राप्ति का मार्ग भी माना गया है।रथ सप्तमी के दिन किया गया व्रत, स्नान, पूजा और दान विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। सनातन ग्रंथों में बताया गया है कि विधिपूर्वक इस व्रत को करने से रोग, दुर्भाग्य और जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं। माना जाता है कि बिना व्रत कथा को पढ़ें या सुने यह व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं कि रथ सप्तमी की व्रत कथा क्या है?

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