Ramzan 2026 Second Ashra: रमजान का पाक महीना तीन हिस्सों यानी अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का और तीसरा जहन्नुम से निजात का माना जाता है। हर अशरे की अपनी अलग रूहानी अहमियत होती है।
रमजान का दूसरा अशरा क्यों खास है?
साल 2026 में रमजान का दूसरा अशरा 1 मार्च से 10 मार्च 2026 तक रहेगा। यह दौर खास तौर पर मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का समय माना जाता है। इन दस दिनों में बंदा अपने रब से अपने किए हुए गुनाहों की सच्चे दिल से तौबा करता है और अल्लाह से माफी की दरख्वास्त करता है।
मगफिरत का अशरा क्यों है खास?
‘मगफिरत’ का मतलब है माफी या क्षमा। दूसरे अशरे में अल्लाह तआला अपने बंदों के गुनाहों को माफ करने का खास मौका देता है। यह समय आत्म-चिंतन, सुधार और रूहानी तरक्की का होता है। हदीस में आता है कि जो शख्स ईमान और सवाब की नीयत से रोजा रखता है, उसके पिछले गुनाह माफ किए जा सकते हैं। इसलिए दूसरे अशरे में रोजा, इबादत और तौबा की अहमियत और भी बढ़ जाती है।
तौबा और इस्तिगफार की अहमियत
दूसरे अशरे में ज्यादा से ज्यादा ‘अस्तगफिरुल्लाह’ पढ़ने की ताकीद की गई है। खास तौर पर यह दुआ पढ़ना फजीलत वाला माना जाता है:
‘अस्तगफिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्ली जम्बी व अतुबु इलैहि’
सच्ची तौबा के लिए तीन बातें जरूरी मानी जाती हैं?
- अपने गुनाह पर दिल से पछतावा होना
- उस गुनाह को तुरंत छोड़ देना
- भविष्य में उसे दोबारा न करने का पक्का इरादा करना
इबादत और नेक अमल का समय
इन दस दिनों में नमाज की पाबंदी, कुरान की तिलावत, जिक्र और दुआओं का खास महत्व है। इसके साथ ही सदका और खैरात देना भी बेहद सवाब का काम माना गया है। जरूरतमंदों की मदद करना, भूखों को खाना खिलाना और नेक व्यवहार अपनाना इंसान की रूह को पाक करता है। मगफिरत का यह दौर सिर्फ जुबानी तौबा तक सीमित नहीं, बल्कि अपने किरदार को बेहतर बनाने का भी समय है।
रूहानी सुकून और अल्लाह की रज़ा
दूसरा अशरा इंसान को अपनी गलतियों पर गौर करने और उन्हें सुधारने का मौका देता है। यह वक्त अल्लाह की रज़ा हासिल करने और जहन्नुम की सजा से बचने की दुआ करने का है। अगर कोई शख्स इन दिनों को गफलत में गंवा देता है, तो वह एक बड़ी रूहानी नेमत से महरूम हो सकता है। इसलिए इन दस दिनों को इबादत, तौबा और नेक कामों से सजाना चाहिए।
