Ram Ji Ke Bhajan: राम नवमी का त्योहार हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल राम नवनी का त्योहार 17 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान राम जी का जन्म उत्सव मनाया जाता है। राम नवमी के दिन राम जी की विधिवत पूजा करने से राम जी की विशेष कृपा साधक को प्राप्त होती है। इस दिन राम भक्त राम मंदिर में जाकर राम जी के भजन कीर्तन करते हैं और रामचरित मान की चौपाईयों का पाठ करते हैं। आज हम आपके लिए यहां राम जी के भजनों की कुछ लिरिक्स लेकर आए हैं। जिन्हें गाकर आप राम जी की भक्ति कर सकते हैं। यहां देखें राम जी के भजन लिरिक्स।
Ram Ji Ke Bhajan (राम जी के भजन लिरिक्स)
राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी लिरिक्स
मेरी झोपड़ी के भाग,आज जाग जाएंगे,
राम आएंगे,
राम आएंगे आएंगे,राम आएंगे,
मेरी झोपडी के भाग,आज जाग जाएंगे,
राम आएँगे ॥
राम आएंगे तो,आंगना सजाऊंगी,
दिप जलाके,दिवाली मनाऊंगी,
मेरे जन्मो के सारे,पाप मिट जाएंगे,
राम आएंगे,
मेरी झोपडी के भाग,आज जाग जाएंगे,
राम आएंगे ॥
राम झूलेंगे तो,पालना झुलाऊंगी,
मीठे मीठे मैं,भजन सुनाऊंगी,
मेरी जिंदगी के,सारे दुःख मिट जाएंगे,
राम आएंगे,
मेरी झोपडी के भाग,आज जाग जाएंगे,
राम आएँगे ॥
मेरा जनम सफल,हो जाएगा,
तन झूमेगा और,मन गीत गाएगा,
राम सुन्दर मेरी,किस्मत चमकाएंगे,
राम आएंगे,
मेरी झोपडी के भाग,आज जाग जाएंगे,
राम आएँगे ॥
मेरी चौखट पे चल के आज लिरिक्स
मेरी चौखट पे चल के आज
चारो धाम आये हैं
बजाओ ढोल स्वागत में
मेरे घर राम आये हैं
कथा शबरी की जैसे
जुड़ गयी मेरी कहानी से
ना रोको आज धोने दो चरण
आँखों के पानी से
बहोत खुश हैं मेरे आंसू
के प्रभु के काम आये हैं
बजाओ ढोल स्वागत में
मेरे घर राम आये है
तुमको पा के क्या पाया है
सृष्टि के कण कण से पूछो
तुमको खोने का दुःख क्या है
कौसल्या के मन से पूछो
द्वार मेरे ये अभागे
आज इनके भाग जागे
बड़ी लम्बी इन्तेज़ारी हुई
रघुवर तुम्हारी तब
आयी है सवारी संदेशे आज खुशियों के
हमारे नाम आये है
बजाओ ढोल स्वागत में
मेरे घर राम आये है
दर्शन पा के हे अवतारी
धनि हुए हैं नैन पुजारी
जीवन नइयाँ तुमने तारी
मंगल भवन अमंगल हारी
मंगल भवन अमंगल हारी
निर्धन का तुम धन हो राघव
तुम ही रामयण हो राघव
सब दुःख हरना अवध बिहारी
मंगल भवन अमंगल हारी
मंगल भवन अमंगल हारी
मंगल भवन अमंगल हारी
चरण की धुल ले लूँ मैं
मेरे भगवन आये है
बजाओ ढोल स्वागत में
मेरे घर राम आये है
मेरी चौखट पे चल के आज
चारो धाम आये हैं
बजाओ ढोल स्वागत में
मेरे घर राम आये हैं
राम को देख कर के जनक नंदनी लिरिक्स
राम को देख कर के जनक नंदनी
बाग में यु खड़ी की खड़ी रह गयी
राम देखे सिया को सिया राम को
चारो अखियाँ लड़ी की लड़ी रह गयी
बाग में यु खड़ी की खड़ी रह गयी
बोली पहली सखी जानकी के लिए
क्या विधाता ने ये जोड़ी है रची
पर धनुष कैसे तोड़ेंगे सुन्दर कुवर
मन में शंका बनी की बनी रह गयी
राम देखे सिया को सिया राम को
चारो अखियाँ लड़ी की लड़ी रह गयी
बाग में यु खड़ी की खड़ी रह गयी
बोली दूसरी सखी ये सच है मगर
पर चमत्कार तो इतना नही जानकी
एक ही बाण में ताड़का जो गिरी
जो गिरी तो पड़ी की पड़ी रह गयी
राम देखे सिया को सिया राम को
चारो अखियाँ लड़ी की लड़ी रह गयी
बाग में यु खड़ी की खड़ी रह गयी
