God Worship Rules: हर धर्म में ईश्वर की आराधना के कुछ विशेष नियम होते हैं जिनका सभी को पालन करना जरूरी होता है। हिंदू धर्म की बात करें तो यहां भी ईश्वर की अराधना के कुछ खास नियम शास्त्रों में बताए गए हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति इन नियमों का पालन करता है उस पर भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है। ऐसे में जानिए पूजा पाठ से जुड़े इन जरूरी नियमों के बारे में।
पूजा-पाठ से जुड़े ये खास नियम क्या जानते हैं आप?
पूजा-पाठ के नियम (Puja Path Niyam)
- नियमित रूप से प्रतिदिन 5 देवी-देवताओं की पूजा महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये पांच देवी-देवता हैं शिव जी, गणेश जी, विष्णु जी, दुर्गा माता और सूर्य देव।
- शास्त्रों में बताया गया है कि एक सुखी और सफल जीवन के लिए नियमित रूप से इन पांच देवी-देवताओं की पूजा अर्चना जरूर करनी चाहिए।
- ईश्वर की पूजा के दौरान जलाये गए धूप-दीप को कभी भी खुद से नहीं बुझाना चाहिए।
- पूजा शुरू करने से पहले दीया और अगरबत्ती जलाएं और अंत में पूजा संपन्न करते हुए प्रसाद चढ़ाएं।
- पूजा के समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि सूर्यदेव की 7, विष्णु जी की 4 और गणेश जी की 3 बार परिक्रमा जरूर करें।
- इस बात का विशेष ध्यान रखें कि शिव जी और गणेश जी की पूजा के दौरान तुलसी के पत्ते का प्रयोग बिल्कुल भी न करें।
- पूजन के दौरान घी के दीये जलाना शुभ फलदायी माना जाता है।
- पूजा में फूल का प्रयोग करते हैं तो ध्यान रखें की उसे स्नान करने के बाद ही तोड़ें। पूजा के लिए कभी भी बिना नहाये फूलों को न तोड़ें।
- पूजा के दौरान हमेशा छोटी उंगली का प्रयोग करते हुए ही भगवान को सिंदूर, चंदन, गुलाल और हल्दी अर्पित करनी चाहिए।
- नियमित पूजा के दौरान भगवान को बेलपत्र, कमल और गंगाजल के अलावा किसी भी तरह की बासी चीज नहीं चढ़ानी चाहिए।
हिन्दू धर्म में विशेष रूप से सुबह और शाम दोनों समय की पूजा को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिदिन ईश्वर की आराधना करने से मन को शांति तो मिलती ही है साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। रोजाना नियम पूर्वक पूजा करने से आपको विशेष लाभ मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
