Pitru Paksha Panchbali Vidhi: पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर को पितृपूर्णिमा से हो गई है और यह अवधि 10 अक्टूबर को पितृ अमावस्या तक चलेगी। श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म के साथ कई ऐसे विधान भी किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य जीव-जगत के प्रति सम्मान और अर्पण की भावना को बनाए रखना है। इन्हीं में से एक पंचबलि है।
पंचबलि कैसे दी जाती है (Image AI Generated and Newsroom Verified
पंचबलि में श्राद्ध के लिए बनाए गए भोजन का एक हिस्सा पांच अलग-अलग निमित्तों के लिए निकाला जाता है। इसमें गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं तथा चींटियों और दूसरे छोटे जीवों के लिए भोजन अर्पित किया जाता है। श्राद्ध कर्म में इसे भोजन कराने से पहले किए जाने वाले महत्वपूर्ण अर्पणों में गिना जाता है।
क्या होती है पचंबलि
पंचबलि शब्द सुनकर कई लोगों के मन में बलि का अर्थ किसी जीव का बलिदान लेने से जुड़ जाता है, लेकिन श्राद्ध कर्म में इसका अर्थ ऐसा नहीं है। यहां ‘बलि’ का आशय अन्न या भोजन का एक अंश अर्पित करने से है। इस विधान में मनुष्य के साथ-साथ दूसरे जीवों और देवताओं के प्रति भी अन्न का हिस्सा समर्पित किया जाता है। यही वजह है कि पंचबलि को श्राद्ध कर्म में करुणा, सम्मान और अर्पण की भावना का प्रतीक है।
कैसे दी जाती है पंचबलि
पंचबलि के पांच हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा गौ बलि, दूसरा कुक्कुर या श्वान बलि, तीसरा काक बलि, चौथा देव बलि और पांचवां पिपीलिकादि बलि होता है। श्राद्ध का भोजन तैयार होने के बाद इन पांचों के लिए अन्न का अंश अलग किया जाता है। प्रत्येक अर्पण के समय संबंधित मंत्र का उच्चारण किया जाता है और भोजन समर्पित किया जाता है।
गौ बलि के लिए मंत्र
पंचबलि में सबसे पहले गाय के लिए भोजन का हिस्सा निकाला जाता है। गाय के निमित्त अन्न अर्पित करते समय यह मंत्र पढ़ा जाता है।
ॐ सौरभेयः सर्वहिताः, पवित्राः पुण्यराशयः।
प्रतिगृह्णन्तु में ग्रासं, गावस्त्रैलोक्यमातरः॥
इदं गोभ्यः इदं न मम॥
इसके बाद भोजन का वह हिस्सा गाय को खिलाया जाता है। मान्यता है के गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है।
कुक्कुर बलि यानी कुत्ते के लिए अन्न
दूसरा अन्न कुत्ते के निमित्त निकाला जाता है। इसके लिए दिए गए विधान में यह मंत्र है।
ॐ द्वौ श्वानौ श्यामशबलौ, वैवस्वतकुलोद्भवौ।
ताभ्यामन्नं प्रदास्यामि, स्यातामेतावहिंसकौ॥
इदं श्वभ्यां इदं न मम॥
मंत्र का उच्चारण करने के बाद कुत्ते को भोजन कराया जाता है।
काक बलि यानी कौए के लिए भोजन
तीसरा अंश कौए के लिए निकाला जाता है, जिसे काक बलि कहा जाता है।
ॐ ऐन्द्रवारुणवायव्या, याम्या वै नैऋर्तास्तथा।
वायसाः प्रतिगृह्णन्तु, भूमौ पिण्डं मयोज्झतम्॥
इदं वायसेभ्यः इदं न मम॥
इस मंत्र के साथ कौए के लिए अन्न रखा जाता है।
देव बलि का मंत्र
पंचबलि का चौथा हिस्सा देवताओं के लिए होता है। इस अर्पण में अन्न देवताओं के साथ उन सभी प्राणियों के निमित्त समर्पित किया जाता है जिनके लिए भोजन की कामना मानी गई है।
ॐ देवाः मनुष्याः पशवो वयांसि, सिद्धाः सयक्षोरगदैत्यसंघाः।
प्रेताः पिशाचास्तरवः समस्ता, ये चान्नमिच्छन्ति मया प्रदत्तम्॥
इदं अन्नं देवादिभ्यः इदं न मम॥
विधान के अनुसार इस अन्न को अग्नि या जल में समर्पित किया जा सकता है अथवा गाय को भी दिया जाता है।
पिपीलिकादि बलि यानी चींटियों और छोटे जीवों के लिए अन्न
पंचबलि का पांचवां और अंतिम हिस्सा चींटियों, कीट-पतंगों तथा दूसरे छोटे जीवों के लिए निकाला जाता है।
ॐ पिपीलिकाः कीटपतंगकाद्याः, बुभुक्षिताः कर्मनिबन्धबद्धाः।
तेषां हि तृप्त्यर्थमिदं मयान्नं, तेभ्यो विसृष्टं सुखिनो भवन्तु॥
इदं अन्नं पिपीलिकादिभ्यः इदं न मम॥
मंत्र पढ़ने के बाद अन्न को ऐसी जगह रखा जाता है जहां चींटियां और दूसरे छोटे जीव उसे ग्रहण कर सकें।
पितृपक्ष में पंचबलि करने का सामान्य विधान क्या है
श्राद्ध के लिए भोजन तैयार करने के बाद सबसे पहले पंचबलि के पांचों हिस्से अलग किए जाते हैं। इसके बाद क्रम से गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों आदि के निमित्त अन्न अर्पित किया जाता है। प्रत्येक अर्पण के समय संबंधित मंत्र बोला जाता है और अंत में ‘इदं न मम’ कहकर अन्न को समर्पित किया जाता है।
मंत्र याद न हो तो क्या करें
हर व्यक्ति के लिए लंबे मंत्रों का पूरा उच्चारण याद रखना आसान नहीं होता uw। दिए गए विधान के अनुसार ऐसी स्थिति में संबंधित जीव का नाम लेकर भी अन्न अर्पित किया जा सकता है। जैसे गाय के लिए ‘गोभ्यो नमः’ कहकर और पिपीलिकादि के लिए ‘इदं अन्नं पिपीलिकादिभ्यो नमः’ कहकर अर्पण किया जा सकता है।
पंचबलि में पांचों अर्पण क्यों है जरूरी
पंचबलि की खासियत यह है कि श्राद्ध के भोजन को केवल मनुष्य तक सीमित नहीं रखा जाता है। गाय से लेकर कुत्ते, कौए, देवताओं और सूक्ष्म जीवों तक के लिए भोजन का हिस्सा अलग किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान जब परिवार अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध करता है, तब पंचबलि के माध्यम से यह भोजन सभी जीवों में पहुंचता है। इससे पितर खुश होते हैं और अपने कुटुंब को आशीर्वाद देते हैं। मान्यता है इस भोजन से पितृ भी तृप्त हो जाते हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
