Pandharpur Ashadhi Yatra 2026 : महाराष्ट्र के पंढरपुर में इन दिनों आषाढ़ी यात्रा पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ चल रही है। भगवान श्री विठ्ठल और माता रुक्मिणी के दर्शन के लिए महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु पंढरपुर पहुंच रहे हैं। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर होने वाली यह यात्रा वारकरी संप्रदाय की सबसे बड़ी धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। श्रद्धालु कई दिनों की पदयात्रा कर ‘ विठ्ठल - विठ्ठल ’ का नाम जपते हुए मंदिर पहुंचते हैं और भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं। यहां आषाढ़ी एकादशी 25 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन पंढरपुर वारी यात्रा का समापन होता है।
पंढरपुर में बन रहे हैं 11 लाख लड्डू (फोटो- सौजन्य से श्री विट्ठल-रुक्मणि मंदिर ट्रस्ट)
पंढरपुर में सालभर होती हैं चार प्रमुख यात्राएं
महाराष्ट्र के पंढरपुर को भगवान विठ्ठल की नगरी कहा जाता है। यहां हर वर्ष माघी, चैत्री, आषाढ़ी और कार्तिकी यात्रा का आयोजन होता है। इनमें आषाढ़ी यात्रा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दौरान लाखों वारकरी संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम की पालकियों के साथ पंढरपुर पहुंचते हैं। इस अवसर पर पूरा शहर भक्ति, कीर्तन और अभंगों से गुंजायमान हो उठता है।
प्रसाद के लिए बन रहे हैं 11 लाख लड्डू
श्री विठ्ठल -रुक्मिणी मंदिर समिति ने इस वर्ष श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रसाद की विशेष व्यवस्था की है। मंदिर समिति के कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र शेलके के अनुसार, इस बार श्रद्धालुओं के लिए 11 लाख बूंदी के लड्डू प्रसाद और 75 हजार राजगिरा (चौलाई) के लड्डू उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। भगवान विठ्ठल के दर्शन के बाद लगभग हर श्रद्धालु प्रसाद के रूप में लड्डू खरीदता है।
इसी मांग को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर प्रसाद का उत्पादन कराया जा रहा है, ताकि किसी भी भक्त को प्रसाद के लिए इंतजार न करना पड़े। मंदिर समिति बूंदी के लड्डुओं का उत्पादन स्वयं अपने प्रबंधन में करा रही है, जबकि राजगिरा के लड्डुओं की खरीद आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से की जा रही है। प्रसाद निर्माण में गुणवत्ता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को पूरी तरह सुरक्षित और सात्विक प्रसाद मिल सके।
किफायती होंगी प्रसाद की कीमतें
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रसाद बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। मंदिर समिति द्वारा 70 ग्राम वजन वाले दो बूंदी के लड्डुओं का एक पैकेट मात्र 20 रुपये में दिया जा रहा है। इसके साथ ही, व्रत करने वाले श्रद्धालुओं के लिए 25 ग्राम वजन वाले दो राजगिरा (चौलाई) के लड्डुओं का एक पैकेट केवल 10 रुपये में उपलब्ध है। प्रसाद की सुगम बिक्री के लिए उत्तर द्वार और श्री संत तुकाराम भवन में दो विशेष केंद्र बनाए गए हैं। भक्तों की सहूलियत को देखते हुए ये दोनों बिक्री केंद्र 24 घंटे लगातार खुले रहेंगे, जिससे देर रात या अलसुबह दर्शन करने वाले भक्तों को भी आसानी से प्रसाद मिल सके।
एफडीए के नियमों का हो रहा है कड़ा पालन
प्रसाद की शुद्धता बनाए रखने के लिए एमटीडीसी भक्त निवास स्थित लड्डू उत्पादन केंद्र में बेहद कड़े सुरक्षा उपाय किए गए हैं। बूंदी के लड्डू बनाने के लिए चने की दाल, चीनी, डबल रिफाइंड मूंगफली तेल, काजू, किशमिश और इलायची जैसी उच्च गुणवत्ता वाली बेहतरीन सामग्रियों का ही उपयोग किया जा रहा है।
मंदिर समिति ने बताया कि प्रसाद निर्माण में एफडीए (Food and Drug Administration) के सभी स्वच्छता और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। इसके अलावा, लड्डू प्रसाद का सरकारी प्रयोगशाला में बकायदा परीक्षण भी कराया गया है, जहां इसे स्वास्थ्य और उपभोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित पाया गया है।
110 कर्मचारी और स्वयंसेवक संभाल रहे हैं पूरी व्यवस्था की कमान
इस विशाल धार्मिक आयोजन में प्रसाद वितरण व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए एक बड़ी टीम तैनात की गई है। प्रबंधक प्रवीण कुमार घाम के अनुसार, बूंदी और राजगिरा लड्डू प्रसाद की सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अनुभवी अधिकारियों के साथ लगभग 110 कर्मचारी और स्वयंसेवक लगातार 24 घंटे तीन शिफ्टों में कार्य कर रहे हैं। इस टीम का मुख्य उद्देश्य यही है कि भगवान विठ्ठल के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को बिना किसी परेशानी और बिना लंबी कतारों के पवित्र प्रसाद उपलब्ध हो सके।
क्यों खास है आषाढ़ी यात्रा
आषाढ़ी यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और सामाजिक समानता का महापर्व है। वारकरी परंपरा में भगवान विठ्ठल को साक्षात प्रेम और करुणा का प्रतीक माना जाता है, जहां जाति और वर्ग का कोई भेद नहीं होता है। हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर पंढरपुर पहुंचते हैं और उनका अटूट विश्वास है कि भगवान विठ्ठल के दर्शन तथा उनका प्रसाद ग्रहण करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। मंदिर समिति द्वारा तैयार किए जा रहे लाखों लड्डू प्रसाद इसी श्रद्धा और निस्वार्थ सेवा भाव का प्रतीक हैं, जो हर भक्त तक भगवान का आशीर्वाद पहुंचाने का एक पवित्र माध्यम बनते हैं।
