Nirjala Ekadashi Vrat Rules: पुण्य की जगह न हो पाप! निर्जला एकादशी पर ये गलतियां भूलकर भी न करें

Nirjala Ekadashi vrat ke niyam: साल 2025 में निर्जला एकादशी का व्रत 6 जून को रखा जा रहा है। निर्जला एकाकदशी को साल की सबसे बड़ी एकादशी कहा जाता है। यहां जानें कि निर्जला एकादशी पर किन नियमों का पालन करना चाहिए। कहां चूक होने पर निर्जला एकादशी व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है।

Nirjala Ekadashi vrat ke niyam: एक साल में 24 एकादशी व्रत आते हैं। इनमें से साल की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है निर्जला एकादशी। कहते हैं कि जिसने भी नियमों के अनुसार इस व्रत को पूर्ण कर लिया, उसका कल्याण जरूर होता है। जैसा कि नाम से साफ है कि निर्जला एकादशी के व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है। इसके अलावा निर्जला एकादशी के कुछ और नियम भी बताए जाते हैं। इस दिन तन और मन - दोनों सात्विक रहने चाहिए। आगे जानें निर्जला एकादशी व्रत के नियम और क्या गलतियां इसमें नहीं होनी चाहिए।

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Nirjala Ekadashi vrat ke niyam

निर्जला एकादशी व्रत के नियम

  1. निर्जला एकादशी व्रत से एक शाम पहले यानी दशमी तिथि की संध्या पर ही तैयारी शुरू हो जाती है। इस शाम को सात्विक भोजन करें और सूर्यास्त से पहले भोजन समाप्त कर लें।
  2. दशमी तिथि पर ब्रह्मचर्य, सत्य, और संयम का पालन करें। रात्रि में एक बार ही भोजन करें और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सोएं।
  3. एकादशी तिथि पर यानी व्रत वाले दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  4. भगवान विष्णु का विधिपूर्वक पूजन करें। सामग्री में तुलसी, पीले फूल, पंचामृत, धूप-दीप आदि रखें।
  5. निर्जला एकादशी का व्रत बिना जल ग्रहण किए रखा जा सकता है। अगर स्वास्थ्य साथ न दे तो फल व जल के साथ ये व्रत रख सकते हैं।
  6. व्रत के दौरान सात्विक विचार रखें और झूठ, क्रोध, परनिंदा, तामसिक भोजन, बुरे विचार आदि से परहेज रखें।

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