निर्जला एकादशी: एक व्रत, 24 एकादशियों के बराबर पुण्य! जानिए इसका दिव्य महत्व

Nirjala Ekadashi Ka Mahatva: निर्जला एकादशी हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पुण्यदायक और कठिन व्रत माना जाता है। यह एकादशी वर्ष की सभी 24 एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। 'निर्जला' का अर्थ होता है – बिना जल के। इस दिन व्रती पूरे दिन अन्न-जल का त्याग करते हैं और भगवान विष्णु की उपासना में लीन रहते हैं। जानिए निर्जला एकादशी क्यों है खास।

Nirjala Ekadashi Ka Mahatva: निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है और इस बार ये 6 जून को मनाई जा रही है। इस दिन व्रती बिना जल पिए व्रत रहते हैं। सनातन धर्म में ये व्रत सबसे कठिन व्रतों में आता है क्योंकि इस समय गर्मी अपने चरम पर होती है। ऐसे में इस व्रत को रखना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन जो इस कठिन व्रत को पूरे विधि विधान से रखता है उसे साल में आने वाली सभी एकादशियों का पुण्य एक साथ प्राप्त हो जाता है। चलिए जानते हैं क्यों ये एकादशी सबसे खास मानी जाती है।

निर्जला एकादशी का महत्व (Nirjala Ekadashi Ka Mahatva)

महाभारत के अनुसार, भीमसेन सभी व्रतों में अन्न और जल त्यागने में असमर्थ थे, अतः उन्होंने महर्षि वेदव्यास से पूछा कि क्या कोई ऐसा व्रत है जो सभी एकादशियों के बराबर फल दे सके? वेदव्यास जी ने उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत बताया और कहा कि यदि तुम यह एक व्रत भी पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक कर लो तो यह वर्ष भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान फल देगा। भीम ने विधि विधान ये व्रत रहकर पुण्य की प्राप्ति की। तभी से इसे भीम एकादशी भी कहा जाने लगा।

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