Nirjala Ekadashi Daan: निर्जला एकादशी, हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह एकादशी साल की सबसे कठिन व्रतों में से एक मानी जाती है, क्योंकि इस दिन जल तक ग्रहण नहीं किया जाता। इसे “भीम एकादशी” भी कहा जाता है और मान्यता है कि इस दिन व्रत, दान और पुण्य करने से साल की संपूर्ण एकादशियों का फल प्राप्त होता है। इस दिन किए गए दान का विशेष महत्व होता है।
निर्जला एकादशी पर क्या दान करें? (Nirjala Ekadashi Par Kya Daan Kare)
जल से भरे मटके का दान– इस दिन शीतल जल का दान जीवन में शांति और शुद्धता लाता है।
गर्मियों की उपयोगी वस्तुएं – जैसे पंखा, छाता, लस्सी, बेल का शरबत, चप्पल आदि।
वस्त्र और अन्न – ब्राह्मणों, साधुओं या गरीबों को वस्त्र, चावल, दाल और फल दान करना उत्तम माना गया है।
ताम्रपात्र और गंगाजल – धार्मिक दृष्टि से विशेष पुण्यदायक होता है।
विष्णु जी से संबंधित वस्तुएं – जैसे तुलसी, पीला वस्त्र, पीली मिठाई आदि।
निर्जला एकादशी पर क्या उपाय करें? (Nirjala Ekadashi Upay)
इस दिन गायत्री मंत्र या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें। तुलसी में जल चढ़ाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। किसी कुएं, तालाब या प्याऊ पर जलदान कराएं। जरूरतमंदों को छाया में बैठाकर फलाहार कराना पुण्यकारी होता है। कहते हैं इस दिन का उपवास और दान अगर पूरी श्रद्धा से किया जाए तो जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है।
