नेपाल की जिस नदी की शालिग्राम शिलाओं से बनेगी रामलला की मूर्ति, उसे भगवान विष्णु ने दिया था वरदान

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Jan 31, 2023, 04:09 PM IST

अयोध्या के भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Temple) में श्री राम और माता सीता की मूर्ति बनाने के लिए आखिर नेपाल की शालिग्राम (Nepal Shaligram Rocks) शिलाओं को ही क्यों चुना गया?

अयोध्या में राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) के लिए भगवान राम और सीता की मूर्ति का निर्माण नेपाल (Nepal) की पवित्र गंडकी नदी (Gandaki River) की शालिग्राम शिलाओं से किया जाएगा। ये शालिग्राम (Shaligram Stones) शिलाएं ऐतिहासिक हैं और इनका खास धार्मिक महत्व माना जाता है। नेपाल की काली गंडकी नदी को सालिग्रामि और नारायणी के नाम से भी जाना जाता है। नारायणी इसलिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु का वास है। ये नदी हिमालय से निकलकर दक्षिण-पश्चिम नेपाल में बहती हुई भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है। जहां ये पटना के पास गंगा नदी से मिल जाती है। इस पवित्र नदी के अंदर जीवित शालिग्राम पाए जाते हैं। जिन्हें भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है।

gandaki nadi

कहानी नेपाल की उस काली गंडकी नदी की, जिसकी शालिग्राम शिलाओं से बनेगी रामलला की मूर्ति

विष्णु प्रिय तुलसी बनी गंडकी नदी

शिवपुराण के अनुसार वृंदा यानी तुलसी दानवों के राजा शंखचूड़ की पत्नी थीं। वो भगवान विष्णु की भी परम भक्त थी। तुलसी के पतिव्रत धर्म के कारण ही राजा शंखचूड़ को कोई हरा नहीं सकता था। जिसके बल पर उसने देवताओं, असुरों, गंधर्वों, नागों, मनुष्यों सभी प्राणियों पर विजय प्राप्त कर ली थी। शंखचूड़ के अत्याचारों से सभी को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु स्वयं शंखचूड़ बनकर वृंदा जो शंखचूड़ की पत्नी थी उसके पास पहुंचे। शंखचूड़ रूपी भगवान विष्णु ने वृंदा को विजय होने की सूचना दी। जिसे सुनकर वृंदा प्रसन्न हो गईं और पतिरूप में आए भगवान का पूजन किया और रमण किया। ऐसा करते ही तुलसी का सतीत्व खंडित हो गया जिससे शंखचूड़ मारा गया।

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