Astrology Tips for Nazar Dosh: ज्योतिषमें छोटे बच्चों के नजर दोष को दूर करने के लिए कई उपायों के बारे में बताया गया है। घर पर जब छोटा बच्चा होता है तो जब उसकी तबियत बिगड़ जाती है, दवाओं का असर नहीं होता, बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है और रोता है तो दादी-नानी अक्सर यह कहती हैं कि बच्चे को किसी कि बुरी नजर लग गई है। छोटे बच्चों को नजर लगने की मान्यता सदियों से चली आ रही है। आज भी लोग इसे मानते हैं। जानते हैं कुछ ऐसे ही उपायों के बारे में जिससे आप अपने छोटे बच्चों को बुरी नजर के दोष से बचा सकते हैं और इन उपायों को आप अपने घर पर ही कर सकते हैं।
बच्चे के नजर दोष से बचाने के ये हैं आसान उपाय
इन उपायों से उतारे नजर
- बच्चे का चिड़चिड़ापन दूर करने के लिए- नजर लगने पर बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं और बिना किसी कारण बहुत रोते हैं। इसके लिए आप एक तांबे के लोटे में पानी और ताजे फूल डाल दें। इस लोटे को बच्चे के सिर से पैर तक 11 बार उतारें। इस पानी को फिर किसी गमले में डाल दें।
- जब बच्चा दूध पीना छोड़ दे- बुरी नजर के दोष के कारण बच्चा दूध पीना छोड़ दे तो आप शनिवार के दिन बच्चे के ऊपर से थोड़ा कच्चा दूध किसी बर्तन में लेकर 7 बार घुमाएं। इस दूध को किसी काले कुत्ते को पिला दें।
- नजरदोष दूर करने का सरल उपाय- हाथ में थोड़ा नमक, राई के दाने, लहसुन, प्याज के छिलके और सूखी लाल मिर्च को लेकर मुट्ठी से बच्चे से सिर से पैर तक 7 बार उतारें। फिर इन सभी चीजों को आग में जला दें। बुरी नजर का दोष दूर हो जाता है।
- दूध मिश्री के उपाय- बच्चे को बुरी नजर लग जाए तो एक लोटे में दूध और मिश्री डालकर बच्चे के सिर से 7 बार उतारें और इसे किसी पीपल पेड़ के पास रख दें। इससे भी बुरी नजर का दोष तुरंत समाप्त जाता है।
कैसे लगती है बच्चों को बुरी नजर
नवजात या छोटे बच्चे बहुत मासूम और आकर्षक होते हैं। बच्चों इतने प्यारे होते हैं कि वह किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। लोगों को भी बच्चों से तुरंत लगाव हो जाता है। लेकिन कुछ लोगों की नजर भारी होती है, जिससे बच्चे को नजर लग जाती है। इससे बच्चे बहुत रोते हैं और चिड़चिड़े हो जाते हैं। बच्चे दूध पीना छोड़ देते हैं और उनके आंखों का रंग भी बदल जाता है। नजर दोष के कारण बच्चे बीमार भी पड़ जाते हैं। ऐसा होने पर आप भी इन उपायों की मदद से अपने बच्चे की बुरी नजर उतार सकते हैं।
डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
