Narasimha Jayanti 2026: भगवान नरसिंह को विष्णु जी का रौद्र अवतार माना जाता है। भगवान विष्णु के दस अवतारों में ये चौथे अवतार हैं। हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु ने आधा शरीर शेर और आधा शरीर मनुष्य का धारण किया था। भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन को नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। नरसिंह भगवान का मुंह सिंह का जबकि शरीर मनुष्य का है। अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए विष्णु जी ने यह अवतार धारण लिया था। हर साल वैशाख मास में नरसिंह जयंती आती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में नरसिंह जयंती कब है, ये आप यहां से जान सकते हैं। साथ ही यहां नरसिंह जयंती का शुभ मुहूर्त, मंत्र और पूजा विधि भी देख सकते हैं।
नरसिंह जयंती 2026 तिथि-
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की जयंती मनाई जाती है। इस बार वह 29 अप्रैल 2026 को सायंकाल 07 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन 30 अप्रैल 2026 को रात्रि 09 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार उदयातिथि को आधार मानते हुए नरसिंह जयंती का पावन पर्व 30 अप्रैल दिन गुरुवार को मनाया जाएगा।
नरसिंह जयंती शुभ मुहूर्त 2026-
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:15 बजे से 04:58 पूर्वाह्न
- प्रतः संध्या- सुबह 04:37 बजे से सुबह 05:41
- विजय मुहूर्त- दोपहर 2:31 बजे से दोपहर 3:24
- सयाहना- संध्या शाम 6:56 बजे से रात 8:00 बजे
- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:45 बजे
- गोधुली मुहूर्त- शाम 6:54 बजे से शाम 7:16
- अमृत कलाम- शाम 7:20 बजे से 9:04 अपराह्न
- रवि योग- सुबह 05:41 बजे से 02:16 पूर्वाह्न 1 मई
- निशिता मुहूर्त- रात 11:57 बजे से 12:40 पूर्वाह्न 1 मई
नरसिंह जयंती मंत्र-
-नरसिंह सुरक्षा मंत्र
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युं मृत्युं नमाम्यहम्॥
-नरसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्र-नखाय विद्महे, तीक्ष्ण-द्रंष्टाय धीमहि।
तन्नो नारसिंह: प्रचोदयात्।।
-नरसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्र-नखाय विद्महे, तीक्ष्ण-द्रंष्टाय धीमहि।
तन्नो नारसिंह: प्रचोदयात्।।
नरसिंह जयंती पूजा विधि-
- प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- एक चौकी पर पीले या लाल वस्त्र बिछाकर भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और स्वच्छ वस्त्र अर्पित करें।
- नृसिंह भगवान को चंदन, कुमकुम, हल्दी, पीले फूल, तुलसी दल, फल, गुड़-चना, मिठाई, धूप और दीप अर्पित करें।
- नृसिंह भगवान के इस मंत्र का जाप जरूर करें- ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥
- इसके बाद प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा का पाठ या श्रवण करें।
- अंत में नृसिंह भगवान की आरती कर प्रसाद सभी में बांट दें।
नरसिंह जयंती की कथा-
प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक शक्तिशाली असुर राजा था जिसने ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त कर यह शक्ति प्राप्त कर ली थी कि उसे न कोई मनुष्य मार सके, न कोई पशु, न दिन में, न रात में, न घर के अंदर, न घर के बाहर, न पृथ्वी पर, न आकाश में और न किसी अस्त्र से और न किसी शस्त्र से उसकी मृत्यु हो। हिरण्यकश्यप चाहता था कि सब लोग केवल उसकी पूजा करें। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को विष्णु भक्ति छोड़ने के लिए बहुत समझाया, डराया और धमकाया, लेकिन प्रह्लाद अपने विश्वास पर अडिग रहा। अंत में, क्रोधित हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा कि तेरा विष्णु कहां है? क्या वह इस खंभे में भी है? प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि वह हर जगह विराजमान हैं। तब हिरण्यकश्यप ने खंभे को तोड़ दिया, और उसी क्षण भगवान विष्णु नरसिंह के रूप में प्रकट हुए- आधा मनुष्य और आधा सिंह। भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप को पकड़ लिया और उसे गोधूलि बेला (न दिन और न रात) में, घर की दहलीज (न घर के अंदर और न घर के बाहर) पर ले जाकर अपनी जांघों पर लिटा लिया (न पृथ्वी पर और न आकाश में) और अपने नाखूनों (न कोई अस्त्र और न कोई शस्त्र) से उसका वध कर दिया। इस प्रकार भगवान नरसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और बुराई का अंत किया।
