Narak Chaturdashi 2026 Par Yam Deepak Kab Jalaye : नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली आज 7 नवंबर 2026 को मनाई जा रही है। दिवाली से एक दिन पहले आने वाले इस पर्व पर यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यम दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है । इसके साथ ही उनको लंबी आयु प्रदान होती है। अगर आप भी आज यमराज के नाम का दीपक जलाने जा रहे हैं, तो जान लीजिए कि इसे कितने बजे जलाना शुभ रहेगा, दीपक में कौन-कौन सी चीजें डालनी चाहिए और पूजा के समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए।
यम दीपक कब और कैसे जलाएं (Image AI Generated and Newsroom Verified)
नरक चतुर्दशी पर यम दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त
नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के नाम का दीपक प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद शाम के समय जलाया जाता है। आज 7 नवंबर को यम दीपक जलाने का शुभ समय शाम 5 बजकर 32 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। वहीं, शाम 5 बजकर 33 मिनट से 6 बजकर 51 मिनट तक का समय विशेष रूप से उत्तम माना गया है।
धनतेरस के दिन अगर आप किसी कारण से यमराज के नाम का दीपदान नहीं कर पाए थे, तो छोटी दिवाली पर भी यह दीपक जला सकते हैं। नरक चतुर्दशी की शाम यम दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और लंबी आयु की प्रार्थना की जाती है।
यम दीपक के लिए कौन-कौन सी सामग्री चाहिए
यमराज के नाम से दीपक जलाने के लिए कुछ विशेष सामग्री रखी जाती है। इस दिन भैंस के गोबर से बना दीपक अधिक शुभ माना जाता है। हालांकि, गोबर का दीपक उपलब्ध न होने पर मिट्टी के दीपक का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यम दीपक तैयार करने के लिए सरसों का तेल या तिल का तेल लें। इसमें चार रुई की बत्तियां लगाई जाती हैं, ताकि दीपक चौमुखा बन सके। इसके अलावा थोड़े से काले तिल और एक या कुछ सिक्के रखे जाते हैं। कुछ लोग दीपक में पीली कौड़ी भी डालते हैं। दीपक के नीचे आसन के रूप में अक्षत यानी साबुत चावल, गेहूं या काले तिल रखे जा सकते हैं।
पूजन के लिए रोली, चंदन, फूल और खील-बताशे भी रख लें। सरसों का तेल इस दीपक के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
नरक चतुर्दशी पर यम दीपक जलाने की विधि
यम दीपक जलाने के लिए शाम के समय सबसे पहले पूजा की सामग्री एक जगह रख लें। इसके बाद भैंस के गोबर या मिट्टी से बने दीपक में सरसों का तेल भरें। दीपक में चार रुई की बत्तियां लगाएं। इसके साथ थोड़े से काले तिल और सिक्के डालें। यदि आपके पास पीली कौड़ी उपलब्ध है, तो उसे भी दीपक में रख सकते हैं।
अब दीपक के नीचे अक्षत, गेहूं या काले तिल रखकर उसे घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें। दीपक का मुख दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है। दीपक जलाने के बाद रोली, चंदन और फूल अर्पित करें। इसके बाद खील-बताशे का भोग लगाएं और हाथ जोड़कर यमराज का ध्यान करें। पूजा करते समय परिवार के सभी सदस्यों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करें। इस दौरान नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें।
यम दीपक जलाते समय पढ़ें यह मंत्र
यमराज के नाम का दीपक जलाते समय इस मंत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
इस मंत्र का भाव है कि मृत्यु के पाश और दंड से रक्षा करने वाले तथा काल के अधिपति सूर्यपुत्र यमराज दीपदान से प्रसन्न हों। इस दीपदान के माध्यम से परिवार की रक्षा और सदस्यों की लंबी आयु की कामना की जाती है।
नरक चतुर्दशी पर नाली के पास दीपक क्यों जलाते हैं
छोटी दिवाली पर घर के मुख्य द्वार के बाहर यम दीपक जलाने के साथ कई जगहों पर नाली के पास भी एक दीपक जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाली के पास दीपक जलाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है। इस दिन नरकासुर के निमित्त भी दीपदान किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में दीपदान की विधि और स्थान में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।
