Chandra Gochar 2026: 13 अक्टूबर 2026 की शाम 7 बजकर 12 मिनट पर चंद्रमा तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर चुके हैं। वह 16 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में वृश्चिक चंद्रमा की नीच राशि मानी जाती है। चंद्रमा का यह गोचर कुछ राशियों के लिए भावनात्मक उलझन, रिश्तों में तनाव, आर्थिक चिंता और जरूरी फैसलों में असमंजस की स्थिति बना सकता है।
चंद्रमा का वृश्चिक में जाना किनके लिए अच्छा नहीं रहेगा (Image AI Generated and Newsroom Verified)
चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति और रोजमर्रा के फैसलों का कारक माना जाता है। जब चंद्रमा वृश्चिक राशि में आते हैं, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है। ऐसे में छोटी बातों को ज्यादा गंभीरता से लेना, पुराने मुद्दों को दोबारा याद करना या जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देना परेशानी बढ़ा सकता है। यह गोचर करीब 7 राशि वालों के लिए सावधानी बरतने वाला समय लेकर आया है। आइए जानते हैं कि वे राशियां कौन सी हैं।
मेष राशि
मेष राशि से चंद्रमा आठवें भाव में गोचर कर रहे हैं। आठवां भाव अचानक होने वाले बदलाव, संयुक्त धन, लोन, इंश्योरेंस और पुराने आर्थिक मामलों से जुड़ा है। ऐसे में किसी पुराने भुगतान, कर्ज या साझा संपत्ति से संबंधित मामले पर दोबारा ध्यान देना पड़ सकता है। कामकाज में भी कोई ऐसी समस्या सामने आ सकती है जिसका समाधान तुरंत समझ न आए। इस दौरान बिना पूरी जानकारी के निवेश करने या किसी के कहने पर पैसा लगाने से बचें। निजी जीवन में मन की बेचैनी के कारण छोटी बात भी बड़ी लग सकती है। भगवान शिव को जल अर्पित करें और किसी भी बड़े आर्थिक फैसले से पहले उसके जोखिम को अच्छी तरह समझें।
वृषभ राशि
वृषभ राशि से चंद्रमा सातवें भाव में हैं। यह भाव शादी, लाइफ पार्टनर, बिजनेस पार्टनरशिप और क्लाइंट से जुड़े मामलों का है। चंद्रमा की स्थिति के कारण पार्टनर की किसी बात से गलतफहमी पैदा हो सकती है। पति-पत्नी के बीच पुराने मुद्दे पर बहस होने या कारोबार में किसी डील की शर्तों को लेकर मतभेद बनने की आशंका रह सकती है। सिंगल लोगों को भी किसी नए रिश्ते में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए। इस दौरान अपनी बात मनवाने की जिद करने के बजाय सामने वाले का पक्ष समझना जरूरी होगा। किसी कारोबारी समझौते को बिना सभी शर्तें पढ़े अंतिम रूप न दें। शिव-पार्वती की पूजा करें और रिश्तों में शांति बनाए रखने की प्रार्थना करें।
कर्क राशि
कर्क राशि से चंद्रमा पांचवें भाव में गोचर कर रहे हैं। यह भाव लव लाइफ, संतान, पढ़ाई, क्रिएटिविटी और बुद्धि से जुड़ा है। इस दौरान प्रेम संबंधों में भावनात्मक उलझन बढ़ सकती है या किसी पुराने मुद्दे पर दोबारा बहस हो सकती है। विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ाई से भटक सकता है और उन्हें अपने काम पर फोकस बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। बच्चों से जुड़े किसी विषय को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। निवेश के मामले में भावनाओं के आधार पर फैसला लेने से बचें। भगवान शिव की पूजा करें और सफेद चावल का दान करें।
सिंह राशि
सिंह राशि से चंद्रमा चौथे भाव में हैं। चौथा भाव घर, मां, प्रॉपर्टी, वाहन और मानसिक शांति का है। इस गोचर के दौरान घर में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव बढ़ सकता है। परिवार के किसी सदस्य के साथ पुरानी गलतफहमी दोबारा सामने आ सकती है। प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को पेपरवर्क और भुगतान की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। काम का दबाव घर के माहौल पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में गुस्से में जवाब देने या किसी पारिवारिक विवाद को बढ़ाने से बचना बेहतर होगा। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और अपनी माता या घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
तुला राशि
तुला राशि से चंद्रमा दूसरे भाव में गोचर कर रहे हैं। यह भाव धन, बचत, परिवार और वाणी से जुड़ा है। इस दौरान पुराने खर्च या रुके हुए भुगतान को लेकर चिंता हो सकती है। परिवार में पैसों से संबंधित किसी बात पर मतभेद बढ़ने की आशंका रहेगी। कारोबारियों को लेन-देन और हिसाब-किताब में सावधानी रखनी चाहिए। गुस्से या भावनाओं में कही गई बात रिश्तों में दूरी पैदा कर सकती है। किसी को पैसा उधार देने या अचानक बड़ी खरीदारी करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन जरूर करें। जरूरतमंद व्यक्ति को चावल या दूध का दान करें और बातचीत में संयम बनाए रखें।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि में ही चंद्रमा गोचर कर रहे हैं। चंद्रमा की नीच राशि होने के कारण यह अवधि इस चंद्र राशि के जातकों के लिए खास तौर पर संवेदनशील मानी जा सकती है। पहला भाव व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, व्यवहार और निजी फैसलों से जुड़ा है। ऐसे में मूड में बदलाव, पुरानी बातों को बार-बार सोचना या किसी फैसले को लेकर असमंजस बढ़ सकता है। नौकरी, कारोबार या रिश्तों में अचानक बदलाव करने का मन हो सकता है, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी बढ़ा सकता है। अपनी भावनाओं को समझने के लिए समय लें और हर बात को व्यक्तिगत रूप से लेने से बचें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और भगवान शिव की पूजा करें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और ज्योतिष विद्या के अच्छे जानकार लेखक द्वारा विश्लेषण करके दी गई है। यह केवल सूचना के लिए दी जा रही है। आपके ऊपर इसका प्रभाव आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और महादशाओं पर भी निर्भर करेगा। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
