Mokshada Ekadashi Ki Aarti: मोक्षदा एकादशी पर जरूर करें ये दो आरती, इनके बिना अधूरी है पूजा

Mokshada Ekadashi Aarti: 11 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु और एकादशी माता की पूजा की जाती है। यहां हम आपको बताएंगे एकादशी पूजा किन आरतियों के बिना अधूरी है।

Mokshada Ekadashi Aarti: हिंदू धर्म में मोक्षदा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यताओं अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। इस साल मोक्षदा एकादशी व्रत 11 दिसंबर को रखा जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु, एकादशी माता और कृष्ण जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस एकादशी के दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। चलिए आपको बताते हैं इस एकादशी पर किन दो आरतियों को जरूर करना चाहिए।

मोक्षदा एकादशी आरती (Mokshada Ekadashi Aarti)

ॐ जय जगदीश हरे,

स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट,

दास जनों के संकट,

क्षण में दूर करे ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

जो ध्यावे फल पावे,

दुःख बिनसे मन का,

स्वामी दुःख बिनसे मन का ।

सुख सम्पति घर आवे,

सुख सम्पति घर आवे,

कष्ट मिटे तन का ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

मात पिता तुम मेरे,

शरण गहूं किसकी,

स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।

तुम बिन और न दूजा,

तुम बिन और न दूजा,

आस करूं मैं जिसकी ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम पूरण परमात्मा,

तुम अन्तर्यामी,

स्वामी तुम अन्तर्यामी ।

पारब्रह्म परमेश्वर,

पारब्रह्म परमेश्वर,

तुम सब के स्वामी ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम करुणा के सागर,

तुम पालनकर्ता,

स्वामी तुम पालनकर्ता ।

मैं मूरख फलकामी,

मैं सेवक तुम स्वामी,

कृपा करो भर्ता॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम हो एक अगोचर,

सबके प्राणपति,

स्वामी सबके प्राणपति ।

किस विधि मिलूं दयामय,

किस विधि मिलूं दयामय,

तुमको मैं कुमति ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,

ठाकुर तुम मेरे,

स्वामी रक्षक तुम मेरे ।

अपने हाथ उठाओ,

अपने शरण लगाओ,

द्वार पड़ा तेरे ॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

विषय-विकार मिटाओ,

पाप हरो देवा,

स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

सन्तन की सेवा ॥

ॐ जय जगदीश हरे,

स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट,

दास जनों के संकट,

क्षण में दूर करे ॥

एकादशी माता की आरती (Ekadashi Mata Ki Aarti)

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।

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