Meen Sankranti 2026 Kab Hai : हिंदू पंचांग और ज्योतिष में सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहा जाता है। हर संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन मीन संक्रांति को विशेष माना जाता है, क्योंकि इसी समय से एक ऐसा काल शुरू होता है जिसमें कई मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है।
मीन संक्रांति कब है?
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मीन संक्रांति के बाद लगभग एक महीने तक विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मीन राशि में सूर्य का गोचर कब होगा?
कब है मीन संक्रांति 2026 (Kab Hai Meen Sankranti 2026)
पंचांग के अनुसार साल 2026 में 15 मार्च की सुबह 1 बजकर 8 मिनट पर सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही मीन संक्रांति कहा जाता है। मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं। इस कारण सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी, जो लगभग एक महीने तक रहता है। इसके बाद जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह समय समाप्त होता है।
मीन संक्रांति से क्यों बंद हो जाते हैं शुभ कार्य?
ज्योतिष के अनुसार सूर्य को ऊर्जा, तेज और मांगलिक कार्यों का प्रमुख कारक माना जाता है, लेकिन जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो उनकी गति और प्रभाव धीमा जाता है। इसी वजह से इस अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है। इसके साथ ही धनु राशि भी गुरु की ही राशि है। यही कारण है कि साल में दो बार खरमास पड़ता है। पहली बार मीन राशि में और दूसरी बार धनु राशि में सूर्य के गोचर से खरमास लगता है। माना जाता है कि इस समय सूर्य की ऊर्जा कम प्रभावी होती है, इसलिए इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना या कोई बड़ा मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। हालांकि इस समय पूजा-पाठ, जप और दान जैसे धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
क्या है इसकी पौराणिक कथा?
मीन संक्रांति और खरमास को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। मान्यता है कि सूर्य देव का रथ सात घोड़े खींचते हैं। लगातार यात्रा करने की वजह से जब ये घोड़े थक जाते हैं तो सूर्य देव उनके स्थान पर कुछ समय के लिए गधों को रथ में जोड़ देते हैं। गधों की गति घोड़ों की तुलना में धीमी मानी जाती है, इसलिए इस समय सूर्य की चाल भी मंद मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है। एक महीने बाद सूर्य देव के रथ में वापस घोड़े जुड़ जाते हैं।
कब खत्म होगा यह समय?
मीन संक्रांति से शुरू होने वाला खरमास लगभग एक महीने तक चलता है। जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह अवधि समाप्त हो जाती है और उसके बाद फिर से विवाह और अन्य शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।
