कौन थीं माता सावित्री? जिनके नाम पर रखा गया वट सावित्री व्रत, क्यों दी जाती है उनके नाम की मिसाल जानिए पूरी कथा

माता सावित्री की कथा भारतीय संस्कृति में प्रेम, समर्पण और साहस का प्रतीक मानी जाती है। उन्होंने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे। जानिए कैसे उनके नाम से शुरू हुआ वट सावित्री व्रत।

भारतीय परंपराओं में कई ऐसे पर्व और व्रत हैं जिनके पीछे गहरी पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। वट सावित्री व्रत भी उन्हीं में से एक माना जाता है। यह व्रत शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। हर साल ज्येष्ठ मास में आने वाला यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रेम, निष्ठा और अटूट विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है।

इस व्रत का नाम माता सावित्री के नाम पर रखा गया है। जिन्हें भारतीय पौराणिक कथाओं में आदर्श पत्नी का दर्जा दिया गया है। उनकी कहानी आज भी लोगों को रिश्तों में धैर्य, साहस और समर्पण का महत्व सिखाती है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने प्रेम और बुद्धिमानी के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान का जीवन वापस पा लिया था। यही कारण है कि आज भी किसी समर्पित पत्नी की तुलना सावित्री से की जाती है।

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