Margashirsha Purnima Ki Aarti (मार्गशीर्ष पूर्णिमा की आरती): मार्गशीर्ष पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शरीर और मन को शुद्ध करने के बाद पूजा स्थल को साफ करके देवी अन्नपूर्णा या भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। पूजा में दीपक, पुष्प, फल, नैवेद्य और पंचामृत का आयोजन किया जाता है। चंद्रमा को देखकर अर्घ्य देना, मंत्रों का जप किया जाता है। पूजा के अंत में दीपदान और आरती करना जरूरी है। इस दिन की पूजा से घर में समृद्धि, सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। पूजा के बाद आरती की जाती है। यहां से आप मार्गशीर्ष पूर्णिमा की आरती देख सकते हैं।
लक्ष्मी रमणा भगवान की आरती (Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti)-
ऊँ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
रतन जड़ित सिंहासन, अदभुत छवि राजे ।
नारद करत नीराजन, घंटा वन बाजे ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
प्रकट भए कलिकारण, द्विज को दरस दियो ।
बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
दुर्बल भील कठोरो, जिन पर कृपा करी ।
चंद्रचूड़ एक राजा, तिनकी विपत्ति हरि ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही ।
सो फल भाग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति किन्ही ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
भव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो ।
श्रद्धा धारण किन्ही, तिनको काज सरो ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
ग्वाल-बाल संग राजा, बन में भक्ति करी ।
मनवांछित फल दीन्हो, दीन दयालु हरि ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
चढत प्रसाद सवायो, कदली फल मेवा ।
धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा ॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
सत्यनारायणजी की आरती, जो कोई नर गावे ।
ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति, सहज रूप पावे ॥
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥
ऊँ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
भगवान विष्णु की आरती (Bhagwan Vishnu Ki Aarti)-
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे..
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे.
जो ध्यावैफल पावै, दुख बिनसेमन का.
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का.
ॐ जय जगदीश हरे...
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी.
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी.
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी.
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी.
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता.
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता.
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति.
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैंकुमति.
ॐ जय जगदीश हरे...
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे.
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे.
ॐ जय जगदीश हरे...
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा.
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा.
ॐ जय जगदीश हरे...
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ हैतेरा.
तेरा तुझको अर्पण क्या लागेमेरा.
ॐ जय जगदीश हरे...
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे.
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे.
ॐ जय जगदीश हरे...
