चूड़ा का क्या महत्व है, क्या है संक्रांति से इसका कनेक्शन, बिहार में चूड़ा कैसे खाया जाता है

Bihar Ka Chura Dahi: मकर संक्रांति के दिन चूड़ा- दही खूब खाया जाता है। लेकिन इसका कारण और महत्व क्या है, इसकी जानकारी कम ही लोगों को होगी। यहां हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही बताएंगे चूड़ा और संक्रांति का कनेक्शन। इतना ही नही, यहां से आप जान सकते हैं कि बिहार में चूड़ा कैसे खाया जाता है।

Bihar Ka Chura Dahi: मकर संक्रांति के अवसर पर घर में तरह-तरह के पकवान बनाए और खाए जाते हैं, लेकिन इसमें भी खिचड़ी, चावल, गुड़ और तिल सबसे खास है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा सबसे ज्यादा खाया जाता है। दही- चूड़ा न केवल स्वाद में बेस्ट होता है, बल्कि हेल्थ के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है। असल में इसे बनाना भी आसान है। दही-चूड़ा में आप अपनी पसंद के अनुसार चीनी या गुड़ मिला सकते हैं। लेकिन अब सवाल ये है कि चूड़ा-दही और मकर संक्रांति का क्या संबंध है और इसे ही क्यों खाया है। इस तरह के सभी सवालों के जवाब यहां मौजूद हैं।

मकर संक्रांति पर चूड़ा-दही खाने का महत्व (pc: canva)

चूड़ा को किस- किस नाम से जाना जाता है?

बिहार और उत्तर प्रदेश में जो चूड़ा है वही महाराष्ट्र में पोहा कहा जाता है। पश्चिम बंगाल और ओड़िशा में इसे ही चिउड़ा के नाम से जाना जाता है। गुजरात में यही चिवड़ा हैं और तमिलनाडु में अवल कहलाता है। नेपाल में तो इसे चिउरा बोलते हैं।

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