Mahalaya 2026 Date: महालया को सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन होता है। बता दें कि साल 2026 में महालया शनिवार, 10 अक्टूबर को पड़ेगी। अगले दिन, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू होंगे। बंगाल में महालया की सुबह मां दुर्गा के आगमन की प्रतीक्षा से जुड़ी है।
महालया कब है 2026 में, जानें अक्टूबर में अमावस्या की तारीख (AI Image)
महालया 2026 डेट एंड टाइम
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर को रात 9:37 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर को रात 9:21 बजे समाप्त होगी। इसलिए महालया और सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। हालांकि तिथि का समय स्थान और पंचांग की गणना के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है।
| महालया 2026 | तारीख और समय |
|---|---|
| महालया / सर्वपितृ अमावस्या | शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 |
| अमावस्या तिथि शुरू | 9 अक्टूबर, रात 9:37 बजे |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 10 अक्टूबर, रात 9:21 बजे |
| शारदीय नवरात्र शुरू | रविवार, 11 अक्टूबर 2026 |
महालया क्या है
महालया को कई लोग दुर्गा पूजा की आहट के रूप में जानते हैं। खासकर बंगाल में यह सुबह एक अलग ही एहसास लेकर आती है। घरों में देवी से जुड़ी स्तुतियां सुनी जाती हैं और पूजा की तैयारियां तेज हो जाती हैं। लेकिन महालया का एक दूसरा, उतना ही गहरा पक्ष भी है। यह पितृ पक्ष की अंतिम तिथि है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या कहते हैं। इस दिन परिवार अपने दिवंगत प्रियजनों को श्रद्धा से याद करते हैं और अपनी परंपरा के अनुसार तर्पण व श्राद्ध करते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या पर किनका श्राद्ध किया जाता है
पितृ पक्ष में सामान्यतः दिवंगत व्यक्ति की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। कई बार परिवार को वह तिथि मालूम नहीं होती। कभी किसी वजह से तय दिन पर श्राद्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या पर पूर्वजों को सामूहिक रूप से याद करने की परंपरा है। इसी वजह से इस दिन को पितृ पक्ष का विशेष दिन माना जाता है।
श्राद्ध की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। किसी घर में तर्पण और पिंडदान किया जाता है, तो कहीं प्रार्थना के साथ भोजन या दान दिया जाता है। यदि आप पहली बार विधिपूर्वक श्राद्ध कर रहे हैं, तो समय और प्रक्रिया के लिए अपने स्थानीय पुरोहित से पूछना उपयोगी रहेगा।
महालया पर तर्पण कब करें
श्राद्ध के लिए पंचांग में कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल को महत्व दिया जाता है। इनका सटीक समय शहर के अनुसार बदलता है। इसलिए अनुष्ठान तय करने के लिए अपने स्थान का पंचांग देखने की सलाह दी जाती है। तर्पण को श्राद्ध विधि का हिस्सा माना जाता है।
क्या महालया से ही नवरात्र शुरू हो जाते हैं
महालया और नवरात्र पास-पास होने के कारण यह सवाल अक्सर उठता है। 2026 में महालया 10 अक्टूबर को है, जबकि शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होंगे। नवरात्र की प्रतिपदा अमावस के अगले दिन पड़ेगी।
