महाकाल मंदिर में सबसे पहले मनी दिवाली, बाबा महाकाल को लगाया केसर-चंदन का उबटन, अन्नकूट का लगा भोग

महाकाल मंदिर में सबसे पहले कैसे मनाई गई दिवाली 2026? रूप चौदस पर बाबा महाकाल को केसर-चंदन का उबटन क्यों लगाया गया? जानें अभ्यंग स्नान, विशेष कपूर आरती और अन्नकूट महोत्सव की खास परंपरा।

Ujjain: उज्जैन में दीपावली का उत्सव शुरू होते ही सबसे पहले बाबा महाकाल के दरबार में दीप पर्व की रौनक दिखाई दी। भगवान महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है। यही वजह है कि यहां हर बड़ा त्योहार सबसे पहले उनके दरबार में मनाने की परंपरा है। दीपावली पर भी सदियों पुरानी इस परंपरा को पूरे श्रद्धा भाव के साथ निभाया गया। रूप चौदस के अवसर पर भस्म आरती में बाबा का अभ्यंग स्नान कराया गया। उन्हें केसर-चंदन का उबटन लगाया गया और नए अन्न से तैयार अन्नकूट का भोग अर्पित किया गया।

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महाकाल में मनाई गई सबसे पहले दिवाली (Image: facebook/Mahakal Daily Darshan)

महाकाल को लगाया गया केसर-चंदन का उबटन

रूप चौदस की सुबह महाकाल मंदिर में विशेष तैयारियां की गईं। भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं और बच्चों ने बाबा महाकाल को केसर और चंदन से तैयार उबटन लगाया। यह रस्म केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मंदिर की पुरानी परंपरा का हिस्सा है।

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