Ujjain: उज्जैन में दीपावली का उत्सव शुरू होते ही सबसे पहले बाबा महाकाल के दरबार में दीप पर्व की रौनक दिखाई दी। भगवान महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है। यही वजह है कि यहां हर बड़ा त्योहार सबसे पहले उनके दरबार में मनाने की परंपरा है। दीपावली पर भी सदियों पुरानी इस परंपरा को पूरे श्रद्धा भाव के साथ निभाया गया। रूप चौदस के अवसर पर भस्म आरती में बाबा का अभ्यंग स्नान कराया गया। उन्हें केसर-चंदन का उबटन लगाया गया और नए अन्न से तैयार अन्नकूट का भोग अर्पित किया गया।
महाकाल में मनाई गई सबसे पहले दिवाली (Image: facebook/Mahakal Daily Darshan)
महाकाल को लगाया गया केसर-चंदन का उबटन
रूप चौदस की सुबह महाकाल मंदिर में विशेष तैयारियां की गईं। भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं और बच्चों ने बाबा महाकाल को केसर और चंदन से तैयार उबटन लगाया। यह रस्म केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मंदिर की पुरानी परंपरा का हिस्सा है।
उबटन के बाद भगवान का गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से अभ्यंग स्नान कराया गया। इस दौरान पूरा मंदिर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। बाबा महाकाल के इस विशेष स्नान के बाद वर्ष में एक बार होने वाली कपूर आरती भी की गई।
साल में एक बार होती है विशेष कपूर आरती
महाकाल मंदिर में रूप चौदस पर होने वाला अभ्यंग स्नान खास महत्व रखता है। इस दिन भगवान को विशेष रूप से सजाया जाता है। स्नान और पूजन के बाद कपूर आरती की जाती है। यह साल में केवल एक बार होने वाला विशेष अनुष्ठान है।
मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। पुजारी परिवार की महिलाएं और बच्चे भी इस धार्मिक आयोजन में अपनी भूमिका निभाते हैं।
बाबा महाकाल को लगाया गया नए अन्न का भोग
दीपावली के अवसर पर महाकाल मंदिर में अन्नकूट महोत्सव भी मनाया गया। इसमें नए अन्न, धान और अलग-अलग सब्जियों से तैयार पकवानों का महाभोग भगवान को अर्पित किया गया।
अन्नकूट का धार्मिक महत्व समृद्धि, अच्छी फसल और अन्न के प्रति आभार से जुड़ा है। नई फसल आने पर भगवान को उसका पहला भोग लगाने की परंपरा भी इसी भावना को दर्शाती है।
चार आरतियों में फुलझड़ी जलाकर हुई दीपावली की शुरुआत
महाकाल मंदिर में दीपावली का स्वागत भी अनोखे अंदाज में किया गया। भस्म आरती से लेकर शयन आरती तक चारों आरतियों में सांकेतिक रूप से एक-एक फुलझड़ी जलाई गई। इस तरह बाबा महाकाल के दरबार में दीप पर्व की शुरुआत हुई। मान्यता और परंपरा के अनुसार, उज्जैन में सबसे पहले भगवान महाकाल के साथ दीपावली मनाई जाती है। इसके बाद पूरे शहर में उत्सव का माहौल बनता है।
