विशाल हृदय वाला नन्हा गुरु जिनको लोगों ने बुलाया 'बाला पीर', जानें गुरु हरकिशन सिंह जी की जीवनी

Guru Har Krishan Ji Biography: गुरु हरकिशन सिंह जी सिखों के आठवें गुरु थे, जिन्हें कम उम्र में ही गुरु गद्दी मिली। उन्हें बाला पीर के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने छोटी उम्र में ही गुरु गद्दी मिली। दिल्ली का बंगला साहिब गुरुद्वारा उनके समर्पण को ही समर्पित है।

Guru Har Krishan Ji Biography: सिखों के इतिहास में जब भी निःस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता के अद्भुत उदाहरणों की चर्चा होती है, गुरु हर किशन सिंह जी का नाम श्रद्धा और आदर के साथ लिया जाता है। सिखों के आठवें गुरु, गुरु हर किशन सिंह जी ने महज पांच साल की उम्र में गुरु गद्दी संभाली और अपने छोटे से जीवन में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसे आज भी दुनिया श्रद्धा से याद करती है।

Guru Harkishan Ji, Gurudwara Bangla Sahib, Gurudwara

सिखों के आठवें गुरु, गुरु हरकिशन सिंह जी का जीवन परिचय

गुरु हरकिशन सिंह जी का जीवन परिचय

7 जुलाई 1656 को पंजाब के कीरतपुर साहिब में जन्मे गुरु हरकिशन सिंह जी, गुरु हर राय जी और माता कृष्ण कौर (सुलक्षणी जी) के छोटे पुत्र थे। वे बचपन से ही शांत, करुणामयी और आध्यात्मिक गुणों से भरपूर थे। उनकी दृष्टि में भेदभाव, जाति-पाति या उम्र का कोई महत्व नहीं था। उनके बड़े भाई राम राय को उनके पिता ने सिख मर्यादा से भटकने के कारण पहले ही गुरु गद्दी से दूर कर दिया था। परिणामस्वरूप, मात्र पांच वर्ष की आयु में गुरु हर राय जी ने अपने छोटे पुत्र हरकिशन को ही अष्टम नानक घोषित किया।

End of Feed