Kuber Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi (भगवान कुबेर की आरती): धनतेरस का त्योहार धन, वैभव और सुख-समृद्धि की कामना का विशेष पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ धन के देवता भगवान कुबेर की आराधना भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कुबेर को धन-संपत्ति और वैभव का स्वामी माना जाता है। इसलिए धनतेरस के दिन उनकी पूजा और आरती करने का विशेष महत्व बताया गया है।
भगवान कुबेर की आरती के लिरिक्स
साल 2026 में धनतेरस का पर्व आज यानी 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान कुबेर की पूजा और आरती का शुभ मुहूर्त शाम 06:02 बजे से शाम 07:57 बजे तक रहेगा। इस समय प्रदोष काल और वृषभ काल का शुभ संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं भगवान कुबेर की आरती (Lord Kuber Aarti) का शुभ समय, पूजा का महत्व और आरती के लिरिक्स।
आज कुबेर जी की पूजा कब करनी है?
धनतेरस के दिन भगवान कुबेर की पूजा और आरती प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में भगवान कुबेर की पूजा और आरती का शुभ मुहूर्त शाम 06:02 बजे से शाम 07:57 बजे तक रहेगा। इस अवधि में प्रदोष काल और वृषभ काल का संयोग बन रहा है। श्रद्धालु इस शुभ समय में भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना और आरती कर सकते हैं।
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भगवान कुबेर की आरती लिरिक्स (Kuber Ji Ki Aarti Lyrics)
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे ।
शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे ।
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।
दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...
स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं ॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...
गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे,
दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें ॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...
भांति भांति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने ।
मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने ॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...
बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े।
अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे ॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...
मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले,
अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले ॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...
यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे,
कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...
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धनतेरस पर भगवान कुबेर की पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में भगवान कुबेर को धन का देवता और यक्षों का राजा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे उत्तर दिशा के दिक्पाल और देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। उन्हें धन-संपत्ति, वैभव और ऐश्वर्य का रक्षक भी माना जाता है। धनतेरस के अवसर पर भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन उनकी आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति की कामना पूरी होती है। यही वजह है कि धनतेरस पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है।
