Sankashti Chaturthi Vrat Katha: कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा से जानिए इस व्रत का महत्व

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Jun 7, 2023, 09:14 AM IST

Krishnapingala Sankashti Chaturthi Vrat Katha In Hindi: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी (Sakat Chauth Katha) के नाम से जाना जाता है। यहां जानिए इस संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा (Sankashti Chaturthi Kahani)।

Sankashti (Ganesh) Chaturthi Vrat Katha In Hindi: आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (Ashad Ganesh Chaturthi) तिथि है। इस दिन कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान गणेश की विधि विधान पूजा करने के बाद संकष्टी चतुर्थी की कथा जरूर पढ़ें जिसके बिना ये व्रत अधूरा माना जाता है। यहां जानिए गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi Vrat Katha) यानी कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा (Krishnapingala Sankashti Chaturthi Katha In Hindi) हिंदी में।

Sankashti Chaturthi Vrat Katha

Sankashti Chaturthi Vrat Katha: संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा हिंदी में (Krishnapingala Sankashti Chaturthi Vrat Katha In Hindi)

द्वापर युग में महिष्मति नगरी में महीजित नाम का एक राजा रहता था। वो पुण्य कर्म करने वाला और प्रतापी राजा था। वह अपनी प्रजा का अच्छे से पालन पोषण करता था। लेकिन उसकी संतान न होने के कारण उसे राजमहल का वैभव अच्छा नहीं लगता था। उसके मन में हमेशा ये ख्याल आता रहता था कि वेदों में निसंतान का जीवन व्यर्थ माना गया हैं और संतानविहीन व्यक्ति द्वारा पितरों को दिया गया जल पितृगण गरम जल के रूप में ग्रहण करते हैं।

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