Kokila Vrat Katha 2024: कोकिला व्रत के दिन करें इस कथा का पाठ, अखंड सौभाग्य की होगी प्राप्ति

Kokila Vrat Katha In Hindi: कोकिला व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन व्रत कथा का पाठ करने से परिवार में सुख, शांति आती है। यहां पढ़ें कोकिला व्रत कथा हिंदी में।

Kokila Vrat Katha In Hindi: कोकिला व्रत हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन किया जाता है। इस साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 20 जुलाई की शाम शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 21 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 46 मिनट पर होगा। कोकिला व्रत की पूजा रात के समय की जाती है। ऐसे में इस साल कोकिला व्रत 20 जुलाई 2024 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा के शाम 7 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 22 मिनट तक का मुहूर्त शुभ रहने वाला है। कोकिला व्रत के दिन माता सती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। कोकिला व्रत सुहागिन महिलाओं के द्वारा पति लंबी आयु के लिए किया जाता है। इस दिन व्रत कथा का पाठ करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

Kokila Vrat Katha In Hindi (कोकिला व्रत कथा )

पौराणिक कथा के अनुसार राजा दक्ष के घर में माता आदिशक्ति ने सती के रूप में जन्म लिया था। राजा दक्ष ने उनका बहुत ही लाड़ से पालन पोषण किया था, लेकिन जब विवाह की वात आई तो दक्ष की बिना आज्ञा के माता सती ने शिव जी से विवाह कर लिया। सती की इस बात से राजा दक्ष बहुत ही क्रोधित हो गए क्योंकि वो भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे। सती और शिव के विवाह के कुछ समय बाद राजा दक्ष ने एक भारी यज्ञ किया । उस यज्ञ में ब्रह्मा विष्णु सहित सारे देवताओं को निमंत्रण दिया, लेकिन शिव जी को नहीं बुलाया पर देवी सती वहां जाना चाहती थी। शिव जी के लाख मना करने के बाद भी सती जिद्द करके राजा दक्ष के यहां यज्ञ में पहुंच गईं। जब सती वहां पहुंची थी सती को अनदेखा कर दिया गया और दक्ष ने शिव जी का भी बहुत अपमान किया। अपने पति का अपमान सती सह ना पाई और यज्ञ की अग्नि में आहुति दे दी। जब शिव जी को इस बात का पता चला तो शिव ने सती को श्राप दिया कि आपने मेरी आज्ञा के बिना अपने प्राण त्याग दिए हैं। अब आपको भी मेरे वियोग में रहना पड़ेगा। उस समय भगवान शिव ने उन्हें 10 हजार साल तक कोयल बनकर वन में भटकने का श्राप दे दिया था। उसके बाद सती ने 10 हजार साल तक कोयल बनकर वन में शिव की पूजा की। फिर पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया।

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