करवा चौथ व्रत कथा लिखित में, करवा चौथ की आरती, चंद्रदेव की आरती, गणेश जी की आरती यहां देखें
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखते हैं। आज करवा चौथ का खास दिन है। यहां आप करवा चौथ व्रत की कथा, करवा चौथ की कहानी, करवा चौथ व्रत क्यों रखा जाता है - जैसी जानकारी ले सकते हैं। साथ ही आप करवा चौथ की पूजा विधि भी जान सकते हैं। जानें करवाचौथ की कथा सुनने का आज का शुभ मुहूर्त। करवा चौथ 2024 चांद पूजा सामग्री (Karwa Chauth 2024 Chand Puja Samagri). जल से भरा तांबे का लोटा, आटे का दीपक, छलनी, मिठाई, रौली, चावल, फूल
करवा चौथ 2025 में 10 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। यानी आज यह व्रत पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। करवा चौथ के व्रत में सुबह सास की ओर से दी गई सरगी खाकर सुहागिन स्त्रियां अपना व्रत आरंभ करती हैं। हालांकि कई जगहों पर सरगी की परंपरा नहीं है। शाम को पूजा में व्रत कथा पढ़ी जाती है और रात के समय चांद देखकर पति और बड़ों का आशीर्वाद लेकर करवा चौथ का पारण किया जाता है। यहां देखें करवा चौथ की व्रत कथा, करवा चौथ क्यों मनाते हैं, करवा चौथ की पूजा विधि आदि की पूरी जानकारी।
करवा चौथ व्रत कथा हिंदी में लिखित, पढ़ें साहूकार और उनके 8 बच्चों की कहानी
करवा चौथ 2025 पूजा मुहूर्त Evening
करवा चौथ 2025 की शाम की पूजा का समय 5:57 बजे से शुरू होगा जो 7:11 बजे तक रहेगा। इस तरह पूजा करने के लिए व्रती महिलाओं को करीब 1 घंटे 14 मिनट का समय मिलेगा।
करवा चौथ की पूजा कैसे करते हैं, यहां देखें करवा चौथ पूजा की पूरी विधि स्टेप बाय स्टेप
Karwa Chauth Vrat Ki Kahani करवा चौथ व्रत कथा, देखें बुढ़िया और गणेश जी की ये कहानी:
बहुत समय पहले की बात है। एक अन्धी बुढ़िया थी जिसका एक लड़का और बहू थी। वो लोग बहुत गरीब थे। वह अन्धी बुढ़िया रोजाना गणेश जी की पूजा किया करती थी। गणेश जी उस बुढ़िया से प्रसन्न होकर एक दिन साक्षात् सन्मुख आकर कहते हैं कि मैं आपकी पूजा से प्रसन्न हूं आपको जो वर मांगना है वो मांग लें। बुढिया कहती है, मुझे मांगना नहीं आता तो कैसे और क्या मांगू।
तब गणेश जी बोले कि अपने बहू- बेटे से पूछकर मांग लो। तब बुढिया ने अपने पुत्र और वधु से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहु ने कहा की पोता मांग लें। तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। फिर बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा तो, पड़ोसियों ने कहा कि बुढ़िया तेरी थोड़ी सी जिंदगी बची है। क्यूँ मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले जिससे तेरी बाकी की जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए।
उस बुढ़िया ने बेटे और बहू तथा पडौसियों की बातें सुनकर घर में जाकर सोचा, कि क्यों न ऐसी चीज मांग लूं जिसमें बेटा बहू और मेरा सबका ही भला हो। जब दूसरे दिन श्री गणेश जी आये और बोले, कि आपको क्या मांगना है कृप्या बताइए? हमारा वचन है जो आप मांगेगी सो वो हो जाएगा। गणेश जी के वचन सुनकर बुढ़िया बोली, हे गणराज! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आँखों में प्रकाश दें, नाती पोते दें, और समस्त परिवार को सुख दें। फिर अंत में मोक्ष दें।
बुढ़िया की बात सुनकर गणेश जी बोले बुढ़िया माँ तूने तो मुझे ठग लिया। खैर जो कुछ तूने मांग लिया वह सभी तुझे मिलेगा। यूँ कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गये। हे गणेश जी! जैसे बुढिया माँ को मांगे अनुसार आपने सब कुछ दिया वैसे ही सबको देना। और हमको भी देने की कृपा करना।
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शहर अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त 2025 (City wise Karwa Chauth Puja Muhurat 2025)-
शहर का नाम और करवा चौथ पूजा मुहूर्त 2025
नई दिल्ली शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
मुंबई शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
नोएडा शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
चेन्नई शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
बेंगलुरु शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
अहमदाबाद शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
जयपुर शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
कानपुर शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
लखनऊ शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
पटना शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
लुधियाना शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
वाराणसी शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
अलीगढ़ शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
चंडीगढ़ शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे तक
आज कितने बजे होगी करवा चौथ की पूजा? यहां से नोट करें 10 अक्टूबर 2025 करवा चौथ पूजा मुहूर्त
करवा चौथ पूजा सामग्री लिस्ट, करवा चौथ की पूजा में क्या क्या सामान लगता है?
- सिंदूर
- मेहंदी
- बिंदी- सौभाग्य का प्रतीक
- मंगलसूत्र
- चूड़ियां
- मांगटीका
- आलता
- काजल
- नथ
- पायल
- बिछिया
- झूमके
- साड़ी/नए वस्त्र
- कमरबंद
- बाजूबंद
- गजरा
- करवा
- सिंदूर
- पानी का लोट
- छलनी
- दीपक
- मिट्टी के डेलिया
- कांस की तिलियां
- मिठाई
करवा चौथ 2025 LIVE: करवा चौथ व्रत कथा
चूंकि साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, इसलिए उनसें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देखा नहीं जा रहा था।
तब साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां पर उन्होंने एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा कि देखों चांद आ गया है। अब तुम अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से भी कहा चांद को अर्घ्य देने का कहा लेकिन ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।
लेकिन साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों की बात को अनसुनी कर दिया और उसने भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इससे उसका करवा चौथ का व्रत भंग हो गया। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और उसके घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी को सही करने में लग गया।
साहूकार की बेटी को जब अपने दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने व्रत के दौरान उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा भाव को देखकर भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हुए और उसके पति को उन्होंने जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
करवा चौथ 2025 LIVE: गणेश जी की आरती
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
करवा चौथ 2025 LIVE: चंद्रदेव की आरती
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी||
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी|
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी||
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे|
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि||
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें|
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा||
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी|
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी||
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी|
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे||
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी|
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें||
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा|
करवा चौथ 2025 LIVE: करवा चौथ की आरती
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया..
ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती..
ओम जय करवा मैया। होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे..
ओम जय करवा मैया।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे..
ओम जय करवा मैया।
करवा चौथ 2025 LIVE: चंद्रमा के दर्शन करते समय पढ़ें ये मंत्र
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट-भूषणम्।
करवा चौथ व्रत के पारण के बाद क्या खा सकते हैं?
करवा चौथ 2025 LIVE: करवा माता की आरती
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया..
ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती..
ओम जय करवा मैया। होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे..
ओम जय करवा मैया।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे..
ओम जय करवा मैया।
Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics: गणेज जी की आरती
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
करवा चौथ की कहानी
उन्होंने अपनी बहन से चंद्रोदय से पहले ही भोजन करने को कहा लेकिन वह नहीं मानी। उसने कहा जब तक चांद नहीं निकलेगा वह भोजन नहीं करेगी। तब भाइयों ने एक योजना बनाई और पीपल के वृक्ष की आड़ में प्रकाश करके कहा- देखो ! चंद्रोदय हो गया। उठो, अर्घ्य देकर भोजन करो। बहन भाइयों की ये चाल समझ नहीं पाई और उसने नकली चांद को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल लिया। भोजन करते ही उसका पति मर गया। वह रोने चिल्लाने लगी। दैवयोग से उस समय इन्द्राणी देवदासियों के साथ वहां से जा रही थीं। रोने की आवाज सुन कर वह साहुकार की पुत्री के पास गईं और उससे रोने का कारण पूछा।
उस कन्या ने सब हाल कह सुनाया। तब इन्द्राणी ने कहा- ‘तुमने करवा चौथ के व्रत में चंद्रोदय से पूर्व ही अन्न-जल ग्रहण कर लिया, इस कारण ही ऐसा हुआ है। अब यदि तुम मृत पति की सेवा करती हुई बारह महीनों तक प्रत्येक चौथ को यथाविधि व्रत करोगी, फिर करवा चौथ को विधिवत गौरी, शिव, गणेश, कार्तिकेय सहित चंद्रमा का विधिवत पूजन करोगी और चंद्र उदय के बाद अर्ध्य देकर अन्न-जल ग्रहण करोगी तो तुम्हारे पति अवश्य जीवित हो उठेंगे।’
ब्राह्मण कन्या ने ठीक ऐसा ही किया। उसने 12 माह की चौथ सहित विधिपूर्वक करवा चौथ का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उनका मृत पति जीवित हो गया। कहते हैं जो भी महिला करवा चौथ का व्रत विधि विधान रखती है उसके पति को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
करवा चौथ 2025 शाम का पूजा का समय
ओम जय करवा मैया आरती
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया..
ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी.. ओम जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती..
ओम जय करवा मैया। होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे..
ओम जय करवा मैया।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे..
ओम जय करवा मैया।
करवा चौथ की व्रत कथा (Karwa Chauth Ki Vrat Katha In Hindi)
करवा चौथ मंत्र (Karwa Chauth Mantra)
ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे।
सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया।
सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम।
रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि द्विषो जहि।।
करवा माता का स्वरूप कैसा है?
बुढ़िया और गणेश जी की करवा चौथ की कहानी
तब गणेश जी बोले कि अपने बहू- बेटे से पूछकर मांग लो। तब बुढिया ने अपने पुत्र और वधु से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहु ने कहा की पोता मांग लें। तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। फिर बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा तो, पड़ोसियों ने कहा कि बुढ़िया तेरी थोड़ी सी जिंदगी बची है। क्यूँ मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले जिससे तेरी बाकी की जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए।
उस बुढ़िया ने बेटे और बहू तथा पडौसियों की बातें सुनकर घर में जाकर सोचा, कि क्यों न ऐसी चीज मांग लूं जिसमें बेटा बहू और मेरा सबका ही भला हो। जब दूसरे दिन श्री गणेश जी आये और बोले, कि आपको क्या मांगना है कृप्या बताइए? हमारा वचन है जो आप मांगेगी सो वो हो जाएगा। गणेश जी के वचन सुनकर बुढ़िया बोली, हे गणराज! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आँखों में प्रकाश दें, नाती पोते दें, और समस्त परिवार को सुख दें। फिर अंत में मोक्ष दें।
बुढ़िया की बात सुनकर गणेश जी बोले बुढ़िया माँ तूने तो मुझे ठग लिया। खैर जो कुछ तूने मांग लिया वह सभी तुझे मिलेगा। यूँ कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गये। हे गणेश जी! जैसे बुढिया माँ को मांगे अनुसार आपने सब कुछ दिया वैसे ही सबको देना। और हमको भी देने की कृपा करना।
माता पार्वती और भगवान शिव की कथा
करवा चौथ की गणेश जी वाली कथा
तब गणेश जी बोले कि अपने बहू- बेटे से पूछकर मांग लो। तब बुढिया ने अपने पुत्र और वधु से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहु ने कहा की पोता मांग लें। तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। फिर बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा तो, पड़ोसियों ने कहा कि बुढ़िया तेरी थोड़ी सी जिंदगी बची है। क्यूँ मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले जिससे तेरी बाकी की जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए।
उस बुढ़िया ने बेटे और बहू तथा पडौसियों की बातें सुनकर घर में जाकर सोचा, कि क्यों न ऐसी चीज मांग लूं जिसमें बेटा बहू और मेरा सबका ही भला हो। जब दूसरे दिन श्री गणेश जी आये और बोले, कि आपको क्या मांगना है कृप्या बताइए? हमारा वचन है जो आप मांगेगी सो वो हो जाएगा। गणेश जी के वचन सुनकर बुढ़िया बोली, हे गणराज! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आँखों में प्रकाश दें, नाती पोते दें, और समस्त परिवार को सुख दें। फिर अंत में मोक्ष दें।
बुढ़िया की बात सुनकर गणेश जी बोले बुढ़िया माँ तूने तो मुझे ठग लिया। खैर जो कुछ तूने मांग लिया वह सभी तुझे मिलेगा। यूँ कहकर गणेश जी अंतर्ध्यान हो गये। हे गणेश जी! जैसे बुढिया माँ को मांगे अनुसार आपने सब कुछ दिया वैसे ही सबको देना। और हमको भी देने की कृपा करना।
करवा चौथ का पूजा विधि
- करवा चौथ की पूजा शाम में ही होती है तो पूजा से पहले स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूजन स्थान को स्वच्छ करें।
- पूजा की चौकी पर करवा माता की तस्वीर रखें।
- सबसे पहले कलश की स्थापना करेंगे तो कलश में सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ, थोड़े अक्षत जरूर डालें।
- कलश के ऊपर आम या अशोक के 5 से 7 पत्ते रखें।
- फिर कलश का मुंह किसी पात्र से ढक दें और उसके ऊपर थोड़े से अक्षत डाल दें।
- फिर कलश पर ही घी का दीपक भी रख दें।
- अब एक करवा लेकर उसमें जल भकर रखें।
- फिर करवे के छेद में 4 सींकें लगा दें। करवे के अंदर आप चांदी का सिक्का या अंगूठी जरूर डालें।
- इसके बाद इसे किसी चीज से ढक दें और उसके मुख पर कुछ मीठा रख दें।
- इसके बाद एक करवा और तैयार करना है जिसे आप दान करेंगी। आप चाहें तो खांड का करवा भी ले सकती हैं।
- फिर करवे के अंदर खील, बताशे, मिठाई, गुलगुले, आदि चीजें भर लें।
- जो महिलाएं घर पर अकेले में करवा चौथ की पूजा करती हैं वो दो करवे भरती हैं एक अपने लिए और एक माता गौरी के लिए।
- पूजा स्थान पर वो छलनी भी रखें जिससे आपको चांद को अर्घ्य देना है।
- पूजा स्थल पर कटोरी में गेहूं भरकर भी जरूर रखें।
- इसके बाद धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर आदि से विधिवत पूजा करें।
- इसके बाद हाथ में अक्षत लेकर व्रत कथा पढ़ें।
- माता को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं और भोग लगाएं।
- अब करवा चौथ की आरती करें।
- फिर चांद निकलते ही चंद्र दर्शन करें और चांद को अर्घ्य दें।
- इसके बाद छलनी से चांद को देखते हुए पति के दर्शन करें और आशीर्वाद लें।
- फिर पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोल लें।
साहूकार के सात लड़के और एक लड़की की पौराणिक कहानी
गणेश जी की आरती
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
